आके :::: एक भी बच्चा न छूटे: डीसी

22 से 24 फरवरी तक चलेगा अभियानलापरवाही न बरतने का डीसी ने दिया निर्देशफोटों नं 13 एसबीजी 13 हैं.कैप्सन: शुक्रवार को बैठक करते सीएस व अन्य कर्मी संवाददाता, साहिबगंज 22 से 24 फरवरी तक चलने वाले पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाये. इस अभियान में एक भी बच्चा न छूटने पाये. यह बातें डीसी उमेश […]

22 से 24 फरवरी तक चलेगा अभियानलापरवाही न बरतने का डीसी ने दिया निर्देशफोटों नं 13 एसबीजी 13 हैं.कैप्सन: शुक्रवार को बैठक करते सीएस व अन्य कर्मी संवाददाता, साहिबगंज 22 से 24 फरवरी तक चलने वाले पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाये. इस अभियान में एक भी बच्चा न छूटने पाये. यह बातें डीसी उमेश प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को विकास भवन सभागार में जिला टॉस्क फोर्स की बैठक में कही. कहा, कि नियमित टीकाकरण के अलावे घर-घर जाकर बच्चे को दवा दें. डीयू लिस्ट अपडेट करें नहीं तो कार्रवाई होगी. वहीं टीकाकरण नियमित करने को लेकर 15 मार्च तक सभी लक्ष्य को पूरा करने का निर्देश दिया गया. अभियान में लापरवाही बरतने वाले सेविका, सहायिका, एएनएम पर कार्रवाई करने की भी बात कही गयी. अवसर पर जिप उपाध्यक्ष नुरूल इसलाम, सीएस डॉ बी मरांडी, एसीएमओ डॉ सिद्धीनाथ, एसएमओ डॉ आशिष तिग्गा, निलांशु, दिलीप सिंह, बाबूल घोष सहित सभी प्रखंड के चिकित्सा पदाधिकारी, सीडीपीओ, बीपीएम, डीपीसी, बीइइओ उपस्थित थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

लोक अदालत न्याय व्यवस्था को बनाता है सरल व सुलभ : पीडीजे

कैसा लग रहा सर” कह ग्रामीणों ने डीसी को दिखायी जर्जर सड़क

साहिबगंज के लाल अमन ने किया कमाल, आईएफएस में 27 रैंक लाकर किया नाम रौशन

टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

यह भी पढ़ें >