जनता के सहयोग से अपराध पर लगेगी लगाम: थाना प्रभारी

फोटो नंबर 13 एसबीजी 24 हैकैप्सन्: शुक्रवार को नगर थाना में बैठक करते थाना प्रभारी प्रतिनिधि , साहिबगंजजनता के सहयोग से ही आपराधिक घटनाओं पर पुलिस लगाम लगा सकती है. यह बातें नगर थाना प्रभारी संजीव कांत मिश्रा ने शुक्रवार को नगर थाना में आयोजित पुलिस जनता सहयोग समिति की बैठक में कही. इस दौरान […]

फोटो नंबर 13 एसबीजी 24 हैकैप्सन्: शुक्रवार को नगर थाना में बैठक करते थाना प्रभारी प्रतिनिधि , साहिबगंजजनता के सहयोग से ही आपराधिक घटनाओं पर पुलिस लगाम लगा सकती है. यह बातें नगर थाना प्रभारी संजीव कांत मिश्रा ने शुक्रवार को नगर थाना में आयोजित पुलिस जनता सहयोग समिति की बैठक में कही. इस दौरान सदस्यों ने मोटरसाइकिल जांच के बाद कागजात में त्रुटि रहने पर न्यायालय नहीं भेजकर थाना से ही जुर्माना के बाद छोड़ देने की बात रखी. इस दौरान वार्ड स्तर पर पांच लोगों की एक शांति समिति का गठन करने का निर्णय लिया गया. थाना प्रभारी ने लोगों को शहर में आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने में सहयोग करने की बात कही. उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में किसी तरह की आपराधिक गतिविधियां हो तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें. इस अवसर पर भाजपा नेता गणेश तिवारी, प्रमोद पांडेय, प्रदीप साह, पंकज मिश्रा, कमल महावर, मो कलीमुद्दीन, अनवर अली, कौशल किशोर ओझा आदि थे.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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