ओके :::: बच्चे अपने लक्ष्य के प्रति हो जागरूक

फोटों नं 12 एसबीजी 5,6 हैं.कैप्सन: गुरूवार को कार्यक्रम में उपस्थित डीसीमार्चफास्ट करते छात्र केंद्रीय विद्यालय का तीसरा वार्षिक उत्सव में खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन नगर प्रतिनिधि, साहिबगंज केंद्रीय विद्यालय परिसर में गुरुवार को तीसरा वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह उपायुक्त उमेश प्रसाद सिंह, विशिष्ट अतिथि प्रो ओए अंसारी […]

फोटों नं 12 एसबीजी 5,6 हैं.कैप्सन: गुरूवार को कार्यक्रम में उपस्थित डीसीमार्चफास्ट करते छात्र केंद्रीय विद्यालय का तीसरा वार्षिक उत्सव में खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन नगर प्रतिनिधि, साहिबगंज केंद्रीय विद्यालय परिसर में गुरुवार को तीसरा वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह उपायुक्त उमेश प्रसाद सिंह, विशिष्ट अतिथि प्रो ओए अंसारी व विद्यालय के प्राचार्य जीवन वर्मा ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्वलित कर किया. विद्यालय के प्राचार्य श्री वर्मा ने डीसी का स्वागत बूके देकर किया. वहीं अतिथियों का स्वागत स्कूली छात्राओं ने स्वागत गीत गाकर किया. कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षक, शिक्षिकाओं व बच्चों को संबोधित करते हुए डीसी श्री सिंह ने कहा कि आप बच्चे देश का भविष्य है. आपलोग ईमानदारी पूर्वक शिक्षा ग्रहण कर लक्ष्य को हासिल करें और आगे बढ़ कर जिले व राज्य का नाम रोशन करें. कार्यक्रम में खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. जिसमें सफल आये प्रतिभागियों को डीसी श्री सिंह ने पुरस्कार व मेडल देकर पुरस्कृत किया. अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावे छात्र-छात्रा उपस्थित थे.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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