ओके ::::::: प्रभारी प्रधानाध्यापिका को दी भावभीनी विदाई

फोटों नं 11 एसबीजी 2,3,4 हैं.कैप्सन: बुधवार को मंचासिन शिक्षकगणउपस्थित शिक्षकगणनृत्य करते छात्राऐंसम्मान पत्र के साथ सुश्री रमा घोष को विद्यालय परिवार ने दिया भावभिनी विदाईनगर प्रतिनिधि, साहिबगंज सरकारी सेवा में सेवानिवृत्त होना सरकारी प्रक्रिया है. यह बातें मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक शंभु नाथ ठाकुर ने बुधवार को दोपहर दो बजे भरतिया रोड स्थित यमुना […]

फोटों नं 11 एसबीजी 2,3,4 हैं.कैप्सन: बुधवार को मंचासिन शिक्षकगणउपस्थित शिक्षकगणनृत्य करते छात्राऐंसम्मान पत्र के साथ सुश्री रमा घोष को विद्यालय परिवार ने दिया भावभिनी विदाईनगर प्रतिनिधि, साहिबगंज सरकारी सेवा में सेवानिवृत्त होना सरकारी प्रक्रिया है. यह बातें मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त शिक्षक शंभु नाथ ठाकुर ने बुधवार को दोपहर दो बजे भरतिया रोड स्थित यमुना दास चौधरी बालिका उच्च विद्यालय में कही. प्रभारी प्रधानाध्यापिका रमा घोष के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह में उपस्थित शिक्षकों व छात्राओं ने कहा कि लोग को एक ना एक दिन सेवानिवृत्त होना ही पड़ता है. समारोह में विद्यालय की छात्रा प्राची पल्लवी व प्रतिक्षा ने स्वागत गीत व शालिनी, रागिनी, प्रतिक्षा व प्रीति कुमारी ने असम की गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया. अवसर पर शिक्षक मो नइम, अरुणा रूखी, प्रशांत कुमार, प्रमोद हांसदा, मो युसूफ, सुमन झा, राजेंद्र प्रसाद साह, दिलीप साह, मोती यादव, हलघर रजक, शिव कुमार यादव, प्रधान सहायक दिलीप पांडेय, नित्यानंद कुंवर, अमन किशोर, सतानंद मंडल, धनकिष्टो साह सहित दर्जनों विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिका व छात्राएं उपस्थित थे.

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टॉप बॉक्स :: : पुराने दिनों को याद कर छलक उठते हैं आंसूफोटो नं 09 एसबीजी 3 है कैप्सन - वृद्धाश्रम में रह रही वृद्ध महिलाएं.सुनील ठाकुर, साहिबगंजमदर्स डे पर प्रभात खबर ने साहिबगंज जिला मुख्यालय स्थित धोबी झरना के पास बने वृद्ध आश्रम में रह रही 9 वृद्ध माताओं का हाल-चाल जाना. वृद्ध आश्रम में 15 लोग हैं, जिनमें नौ महिला व छह पुरुष हैं. वहां रह रही अर्चना राय, शकुंतला देवी, उषा राय, नाचो मुर्मू, सुलमा किस्कू, बसंती देवी, गायत्री देवी, मोनिका देवी ने बताया कि लोग कहते हैं कि मां के पैरों के नीचे स्वर्ग है. निश्चित रूप से यह बात गलत नहीं हो सकती क्योंकि धार्मिक किताब में भी लिखी हुई है. लेकिन आजकल के बच्चे इसे समझ नहीं पा रहे हैं. यही कारण है कि बूढ़े मां-बाप को बच्चे बोझ समझते हैं. रिफ्यूजी कॉलोनी निवासी उषा राय ने बताया कि मदर्स डे पर सभी आते हैं लेकिन आखिर परिजन क्यों नहीं आते हैं. बरमसिया बरहेट निवासी सलमा किस्कू बताती हैं कि पहले हम लोग सुना करते थे कि बड़े-बड़े शहरों में शहर के लोग अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखते हैं पर अब आदिवासी लोगों को भी अपने मां-बाप भारी लगने लगे हैं. गायत्री देवी ने बताया कि यहां जिसे देखते हैं, मुझे लगता है कि सभी लोग हमारे परिवार हैं. अलग से हमारा भाई और रिश्तेदार क्यों मेरे से मिलने आयेगा? शहर व आसपास की ही महिलाएं यहां रह रहीं हैं. सबसे बड़ा दुख तब होता है जब बाजार से लोग सम्मानित करने आते हैं. मैं अपने परिजनों को देखने के लिए बेताब रहती हूं. उधवा की रहनेवाली अर्चना राय ने बताया कि मैं अपने परिजनों का नाम नहीं बताऊंगी, मुझे शर्म आती है. मेरे परिजन को शर्म नहीं आती है. पालन-पोषण कर बच्चों को बड़ा किया. आज हम बोझ बन गये हैं. शहर के कई समाजसेवी व संगठन के लोग मदर्स डे पर कार्यक्रम करने पहुंचेंगे.

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