कौन हैं डॉ बीपी कश्यप? रांची विधानसभा सीट पर सीपी सिंह और महुआ माजी के खिलाफ लड़ रहे चुनाव

Who Is Dr BP Kashyap: कौन हैं डॉ बीपी कश्यप? झारखंड विधानसभा चुनाव में रांची से सीपी सिंह और महुआ माजी जैसे दिग्गजों के खिलाफ चुनाव के मैदान में उतरे हैं.

Who is Dr BP Kashyap|Jharkhand Assembly Election 2024|Ranchi Vidhan Sabha||झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 के पहले चरण का नामांकन पूरा हो चुका है. स्क्रूटनी भी हो गई है. पहले चरण की 43 विधानसभा सीटों पर कितने उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, इसका खुलासा अभी तक चुनाव आयोग ने नहीं किया है. रांची विधानसभा सीट पर कितने उम्मीदवार होंगे, आज स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन रांची विधानसभा सीट पर एक व्यक्ति ने नामांकन दाखिल करके सबको चौंका दिया है. उनका नाम है डॉ बीपी कश्यप.

सीपी सिंह और महुआ माजी के मैदान में डॉ बीपी कश्यप

रांची विधानसभा सीट झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सबसे सुरक्षित सीटों में एक है. वर्ष 1996 से चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह (सीपी सिंह) लगातार यहां से जीत रहे हैं. इस बार आखिरी चुनाव लड़ रहे हैं. इसी सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी भी मैदान में उतर चुकीं हैं. इन दो दिग्गज राजनेताओं के बीच रांची के नामचीन नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भी चुनाव लड़ने के लिए कमर कस चुके हैं.

डॉ कश्यप ने 40 साल में रांची के 1.86 लाख मरीजों का किया इलाज

उन्होंने झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है. अपने 40 साल के करियर में रांची के 1.86 लाख मरीजों की आंखों का इलाज करने वाले डॉ बीपी कश्यप झारखंड ही नहीं, देश के जाने-माने नेत्र रोग विशेषज्ञ (Eye Specialist) हैं. उनका कहना है कि 67 साल की उम्र में मैंने बहुत कुछ कमाया. पैसे कमाए, नाम कमाया. अब समाज की सेवा करना चाहता हूं. समाज ने आज तक मुझे दिया है, अब मैं समाज को कुछ देना चाहता हूं. डॉ कश्यप ने कहा कि रांची में 13 नवंबर को वोटिंग है. तब तक मैं अपने सभी मतदाताओं तक पहुंच जाऊंगा. उनको अपने मेनिफेस्टो (घोषणा पत्र) के बारे में बताऊंगा.

रांची में इन्फ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछाना है मकसद

डॉ कश्यप कहते हैं कि वह रांची में इन्फ्रास्ट्रक्चर का जाल बिछाना चाहते हैं. खासकर स्वास्थ्य, सड़क के मामले में. स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का सृजन करना चाहते हैं. घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि औद्योगिक घरानों के साथ बातचीत करके स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाएंगे. मैंने 40 साल तक इस क्षेत्र में लोगों की आंखों का इलाज किया है. इतने दिनों में विधानसभा की समस्याओं के बारे में भी जाना है. विधायक बनकर उसका समाधान करना चाहता हूं.

बीपी कश्यप के पिता ने रिम्स में किया था पहला आई ट्रांसप्लांट

डॉ बीपी कश्यप के पिता का नाम डॉ भरत प्रसाद कश्यप था. संयुक्त बिहार का पहला आई ट्रांसप्लांट करने का रिकॉर्ड उनके नाम है. उन्होंने 1979 में राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स), जिसे पहले राजेंद्र मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (आरएमसीएच) कहा जाता था, में किया था. आंखें श्रीलंका से मंगाई गईं थीं. इसमें ऑस्ट्रेलिया के डॉ पीटर एंडरसन ने उनकी मदद की थी. तब 6 लोगों में नेत्र रोग प्रत्यारोपण किया गया था. इसके बाद लोकल लेवल पर नेत्र प्रत्यारोपण यानी आई ट्रांसप्लांटेशन बंद हो गया, क्योंकि लगातार श्रीलंका से आंखें मंगवाना कठिन काम था.

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रांची में बनाया सबसे बड़ा सुपर स्पेशियलिटी आई हॉस्पिटल

डॉ बीपी कश्यप ने राजधानी रांची में झारखंड के सबसे बड़े सुपर स्पेशियलिटी आई हॉस्पिटल की स्थापना की. NABH के मानक के अनूरूप. इसमें काम करने वाले सभी डॉक्टर एम्स से ट्रेंड हैं. इस अस्पताल में कॉर्निया, रेटिना और आई ट्यूमर, कैंसर और ग्लूकोमा के विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद हैं. गंभीर से गंभीर नेत्र रोग का यहां इलाज संभव है. डॉ कश्यप कहते हैं कि झारखंड के लोगों को अभी भी इलाज के लिए दिल्ली या वेल्लोर जाना पड़ता है. झारखंड में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करके इस स्थिति को बदलना है.

हर साल 100 से अधिक आई ट्रांसप्लांट

डॉ कश्यप के अस्पताल में हर साल 100 नेत्र प्रत्यारोपण होते हैं. जनवरी 1996 में उन्होंने अपनी पत्नी डॉ भारती कश्यप की मदद से टायरलेस आई डोनेशन अवेयरनेस कैंपेन की शुरुआत की थी. इसके बाद झारखंड में पहला नेत्रदान और आई ट्रांसप्लांटेशन संभव हो पाया. इसके बाद दोनों ने मिलकर वर्ष 2002 में कश्यप मेमोरियल आई बैंक की स्थापना की. आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से तय किए गए 150 नेत्र प्रत्यारोपण के लक्ष्य में से 100 से अधिक आई ट्रांसप्लांट डॉ कश्यप और उनकी पत्नी की मदद से होते हैं.

डॉ भारती कश्यप के साथ मिलकर 20 लाख बच्चों की नेत्र जांच की

डॉ कश्यप की उपलब्धियां यहीं खत्म नहीं हो जातीं. उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 20 लाख से अधिक बच्चों की आंखों की जांच और उनका इलाज किया. हजारों बच्चों को मुफ्त में चश्मे दिए. सैकड़ों बच्चों का मुफ्त में ऑपरेशन करके उनको नई जिंदगी दी. कोल्हान, संताल परगना, पलामू, सारंडा के अलावा रांची, खूंटी और अन्य सुदूरवर्ती इलाकों में वह कैंप लगाकर लोगों का इलाज करते हैं.

डीएनबी एंड फेलोशिप फॉर ऑप्थाल्मोलॉजी का बड़ा केंद्र बनाया

वर्ष 2005 में कश्यप आई हॉस्पिटल को पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत का श्रेष्ठ अस्पताल के रूप में मान्यता दी गई. आज यह डीएनबी एंड फेलोशिप फॉर ऑप्थाल्मोलॉजी का बड़ा केंद्र बन चुका है. देश के अलग-अलग हिस्सों से स्टूडेंट्स यहां आते हैं और अत्याधुनिक तकनीक से आंखों का इलाज करना सीखते हैं. डॉ कश्यप का पूरा परिवार नेत्र रोगियों की सेवा के लिए समर्पित है. डॉ कश्यप की पत्नी भारती कश्यप भी देश की जानी-मानी नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं. उनके बेटे भी इसी फील्ड में बड़ा नाम हैं.

डॉ कश्यप के परिवार को मिल चुके हैं कई सम्मान

डॉ बीपी कश्यप को गोल्ड मेडल और फाइको की मानद उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है. इसी साल 3 अगस्त को नेत्र रोग के इलाज के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए उनको नई दिल्ली में ISCKRS Excellence Award से सम्मानित किया गया. उनके बेटे डॉ विभूति कश्यप, जो एम्स नई दिल्ली से विट्रियो रेटिना स्पेशलिस्ट हैं, ने वर्ष 2019 में ऑल इंडिया आई सोसाइटी को झारखंड से सबसे ज्यादा डायबिटिक रेटिनोपैथी का रिसर्च डेटा भेजा. इसके लिए उन्हें सोसाइटी की ओर से सम्मानित किया गया. डॉ भारती कश्यप ‘नारी शक्ति पुरस्कार 2017’ समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित हो चुकीं हैं.

डॉ बीपी कश्यप के नाम हैं कई उपलब्धियां

  • 1984 में डॉ बीपी कश्यप ने रांची में रेटिना ट्रीटमेंट की शुरुआत की.
  • 1984 से 2004 तक डॉ बीपी कश्यप झारखंड-बिहार के इकलौते रेटिना सर्जन थे.
  • 2003 में प्रीमैच्योर बच्चों की आंखों की रेटिना का इलाज शुरू किया.
  • 2006 में रेटिना के इलाज के लिए इंट्राविट्रियल इंजेक्शन की शुरुआत की.
  • 2009 में रेटिना की सर्जरी की सबसे आधुनिक कॉन्स्टेलशन मशीन झारखंड लाए.
  • 2018 में रेटिना के इलाज की सबसे आधुनिक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी मशीन झारखंड में लाए.
  • 2021 में रेटिना की दवाइयों का क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया.
  • 2022 में झारखंड के पहले और एकमात्र राष्ट्रीय मान्यताप्राप्त प्रशिक्षण सुविधा की शुरुआत की.

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By Mithilesh Jha

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