सुन्नी वक्फ बोर्ड का बड़ा फैसला- हिसाब नहीं देने वाली संस्थाओं की मान्यता होगी रद्द

Waqf News Jharkhand: झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड ने एक बड़ा फैसला किया है. कहा है कि संपत्ति का हिसाब और ऑडिट रिपोर्ट नहीं देने वाली संस्थाओं की मान्यता रद्द कर दी जायेगी. सुन्नी वक्फ बोर्ड की राजधानी रांची में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया. फैसला हुआ कि जिन कमेटियों में विवाद है, उसके हल के लिए कमेटी वहां जायेगी. कितने लोगों की कमेटी कहां जायेगी, इसकी लिस्ट और तारीख दोनों जारी कर दी गयी है.

Waqf News Jharkhand| वक्फ संपत्ति पर झारखंड राज्य सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बड़ा फैसला किया है. बोर्ड ने तय किया है कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति की ऑडिट रिपोर्ट और हिसाब नहीं देने वाली झारखंड की संस्थाओं की मान्यता समाप्त कर दी जायेगी. इससे पहले उन्हें चेतावनी पत्र दिया जायेगा. सांसद सरफराज अहमद की अध्यक्षता में राजधानी रांची में बोर्ड की बैठक में तय हुआ कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर वर्षों से काम कर रही संस्थाओं की सूची तैयार की जाये. इनसे ऑडिट रिपोर्ट मांगी जाये. अब तक के कामकाज का हिसाब मांगा जाये. जो संस्था बोर्ड के आदेश का पालन नहीं करेगी, उसकी मान्यता समाप्त कर दी जायेगी. दूसरी तरफ, झारखंड सरकार के मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा है कि झारखंड में वक्फ कानून लागू नहीं होगा. उन्होंने भाजपा पर वक्फ संशोधन कानून के जरिये मुस्लिम कौम को परेशान करने का आरोप लगाया है.

19 अप्रैल को गिरिडीह जायेगी कमेटी

सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक में तय हुआ कि वक्फ की संपत्ति को लेकर जिन जगहों पर कमेटियों का विवाद है, उसे दूर करने के लिए कमेटी बनायी गयी है. 19 अप्रैल को गिरिडीह और 22 अप्रैल को कमेटी चाईबासा जायेगी. दोनों जगहों पर विवाद को खत्म करने की कोशिश होगी. कमेटी में राजधनवार के पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, एके रसीदी, मो फैजी होंगे.

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22 अप्रैल को एक कमेटी जायेगी चाईबासा

एक कमेटी 22 अप्रैल को चाईबासा जायेगी. कमेटी वहां उठे विवाद पर बात करेगी. वहां एके रसीदी, मो फैजी, महबूब आलम और इबरार अहमद जायेंगे. राजधानी रांची में अंजुमन के मुद्दे पर बैठक में चर्चा की गयी. इस पर अंजुमन की कमेटियों से बात करने का निर्णय लिया गया. बैठक में पूर्व विधायक निजामुद्दीन अंसारी, सामाजिक कार्यकर्ता इबरार अहमद, मौलाना तहजीबुल हसन रिजवी, मो फैजी, एके रशीदी, शकील अख्तर, सरकार के संयुक्त सचिव आसिफ हसन व अन्य मौजूद थे.

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झारखंड में वक्फ कानून नहीं लागू होगा – डॉ इरफान अंसारी

स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने कहा कि भाजपा सरकार वक्फ बोर्ड संशोधित कानून लाकर मुसलमानों का हक छीनना चाहती है. जनहित के कार्यों से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है. साजिश के तहत वक्फ कानून को संशोधित कर हमारे कौम को परेशान किया जा रहा है. झारखंड में वक्फ बोर्ड के नये कानून को किसी हाल में लागू नहीं होने देंगे. भाजपा सरकार ने यह कानून लाकर लोगों को सड़क पर उतरने के लिए विवश कर दिया है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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