Ranchi news : राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद रिक्त, लंबा हो रहा निकाय चुनाव का इंतजार

अप्रैल के अंतिम सप्ताह में मुख्यमंत्री के यूरोप दौरा से लौटने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति संभव है.

रांची. झारखंड में नगर निकाय चुनाव का इंतजार और लंबा हो रहा है. राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद रिक्त होने की वजह से निकाय चुनाव कराने की प्रक्रिया बंद हो गयी है. अप्रैल के अंतिम सप्ताह में मुख्यमंत्री के यूरोप दौरा से लौटने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति संभव है. नगर निकाय चुनाव कराने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिया गया चार महीने का समय 16 मई को पूरा हो रहा है. मौजूदा परिस्थितियों में यह लगभग तय हो गया है कि उक्त अवधि में नगर निकाय चुनाव कराया जाना संभव नहीं है. ऐसे में राज्य सरकार न्यायालय से चुनाव कराने के लिए और समय मांगेगी. मालूम हो कि 24 मार्च को डॉ डीके तिवारी का कार्यकाल पूरा होने के बाद से यह पद रिक्त पड़ा हुआ है.

तैयारियों पर पड़ रहा है असर

राज्य निर्वाचन आयुक्त का पद खाली रहने का सीधा असर नगर निकाय चुनाव की तैयारियों पर पड़ रहा है. आयोग को जिलों से चुनाव पूर्व तैयारियों के आलोक में दिये गये निर्देशों के अनुपालन की सूचना नहीं मिल रही है. जिलों में की जा रही तैयारियों की समीक्षा नहीं हो पा रही है. उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य में शहरी निकायों का चुनाव कराने के पूर्व की प्रक्रिया संपादित की जा रही थी. चुनाव आयोग से मतदाता सूची लेकर उसे स्थानीय निकायों की सीमा के आलोक में तैयार कर लिया गया है. जिला मुख्यालयों से मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है.

रांची को छोड़ कर शेष निकायों में हो गया ट्रिपल टेस्ट

राज्य के नगर निकाय चुनाव में आरक्षण निर्धारित करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा ट्रिपल टेस्ट लगभग पूरा कर लिया गया है. रांची को छोड़ कर शेष 23 जिलों में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. जिला प्रशासन द्वारा सूची जारी करने के बाद आपत्तियां आमंत्रित कर उसका निराकरण भी किया जा रहा है. ट्रिपल टेस्ट पूरा होने के बाद निकाय चुनाव कराने की पूरी जिम्मेवारी राज्य निर्वाचन आयोग की होगी.

पांच वर्षों से लंबित है निकाय चुनाव

राज्य के 13 नगर निकायों में वर्ष 2020 से ही चुनाव लंबित है. वहीं, 35 अन्य शहरी निकायों का कार्यकाल वर्ष 2023 के मार्च-अप्रैल महीने में समाप्त हुआ था. यहां उल्लेखनीय है कि संविधान के 74वें संशोधन में शहरी निकायों में चुनाव नहीं कराना स्थानीय निकायों को कमजोर करना माना गया है. नगर निकायों का चुनाव नहीं होने से राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. चुनाव में हो रही देरी के कारण वित्त आयोग की अनुशंसा पर केंद्र सरकार ने राज्य को दिये जानेवाले अनुदान पर रोक लगा दी है. शहरी निकायों के विकास के लिए आयोग से लगभग 1600 करोड़ रुपये पर झारखंड का दावा है.

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Author: RAJIV KUMAR

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