PHOTOS: टाटा स्टील झारखंड लिटरेरी मीट के दूसरे दिन दिग्गज साहित्यकारों-फिल्मकारों ने की चर्चा

टाटा स्टील झारखंड लिटरेरी मीट के दूसरे दिन कई विषयों पर अलग-अलग विषयों के विद्वानों ने चर्चा की. इसमें साहित्य से लेकर फिल्म जगत और अन्य विषयों पर गंभीर चिंतन हुआ. पूरा राउंडअप यहां देखें.

प्रशांत पंडिता की पुस्तक दो कश्मीरी दोस्तों की कहानी कहती है

पेशे से इंजीनियर प्रशांत पंडिता की पहली किताब द जेहलम बॉयज को लेकर शहाना चटर्जी ने उनसे बात की. लेखक ने बताया कि मैं मूल रूप से कश्मीर का रहने वाला हूं और मेरी जो पहली किताब है, वह उसी कश्मीर के दो दोस्तों की कहानी है. इसके पहले पार्ट में मेरा लाइफ एक्सपीरिंयस है, जिसे मैंने शब्द देने का काम किया है. सेकेंड पार्ट में फिक्शन है. इसका कैरेक्टर निशांत, वह कश्मीरी पंडितों का प्रतिनिधित्व करता है. कश्मीर घाटी के दो लड़के, मुदस्सिर, एक अमीर कश्मीरी मुस्लिम परिवार से और निशांत, एक संपन्न कश्मीरी पंडित परिवार से है.

डोरंडा की पहली बर्ड वूमन हैं जमाल आरा

डोरंडा की जमाल आरा का नाम शायद पहले किसी ने नहीं सुना होगा. यह बात शनिवार को संरक्षणवादी, वन्य जीव इतिहासकार और कहानीकार रजा काजमी के साथ बातचीत में बिक्रम ग्रेवाल ने कही. द बर्ड वुमन ऑफ डोरंडा पर बात करते हुए रजा काजमी ने बताया कि 1970 में एक बुक बर्ड वाचर प्रकाशित हुई थी, जिसकी लेखिका जमाल आरा थीं. भारत की पहली महिला थीं, जो चिड़ियों पर काम करती थीं. वहीं, विक्रम ग्रेवाल ने कहा कि झारखंड में जंगल तो हैं, लेकिन वो डेड हैं. इस पर रजा काजमी ने कहा कि यहां जानवर पर बात नहीं होती है.

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डॉ मयंक मुरारी की भारतीय संस्कृति पर दो किताबें प्रकाशित

भारतीय संस्कृति पर आधारित दो किताबें प्रकाशित हुईं हैं. प्रभात प्रकाशन से जंबूद्वीपे-भरतखंडे और वाणी प्रकाशन से भगवा ध्वजा का प्रकाशन हुआ है. इन दोनों किताबों के लेखक राजधानी के चिंतक और लेखक डाॅ मयंक मुरारी हैं. हिंदू जीवन में रोजाना स्मरण किये जानेवाले संकल्प मंत्र में देश और काल से संबंधित दर्शन की व्याख्या जंबूद्वीपे-भरतखंडे पुस्तक में की गयी है. वहीं, भगवा ध्वज में भारतीय इतिहास के विभिन्न कालखंड और राजवंश में अपनाये गये ध्वज की कथाओं को समेटा गया है. डाॅ मयंक मुरारी के संपूर्ण लेखन का उद्देश्य भारतीय जीवन और संस्कृति की ज्ञानात्मक समृद्धि से परिचय कराना, इतिहास, परंपरा और विरासत का वैज्ञानिक विश्लेषण करना तथा लोक जीवन में निहित नैतिक और जीवन मूल्यों को प्रस्तुत करना है. उनकी अब तक 15 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.

भावनात्मक लेखन के लिए महसूस करनी होगी भावना

झारखंड लिटरेरी मीट के दौरान मालविका बनर्जी ने कथाकार जैरी पिंटो के साथ उनके उपन्यास संग्रह पर विमर्श किया. मालविका ने जैरी पिंटो के उपन्यास ‘द एजुकेशन ऑफ यूरी’ की कहानी पर चर्चा की. जैरी ने बताया कि लोग आज भी यंग एडल्ट स्टोरी पढ़ना पसंद करते हैं. इसकी मांग आज भी साहित्य बाजार में बनी हुई है. यूरी एक ऐसा चरित्र है, जिसने कभी दोस्त नहीं बनाये. पर उम्र के साथ 15 वर्ष की आयु में पहली बार महिला मित्र बनी और कहानी उसके रोमांटिक सफर की है. जैरी ने कहा कि कहानी लिखते समय पात्र की भावना को महसूस करना होगा. यह तभी संभव है, जब लेखक या कोई भी व्यक्ति पात्र के भावनात्मक पक्ष से जुड़ेंगे.

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आदिवासी लोक संस्कृति को समझने की जरूरत

शाम 04:50 बजे साहित्यकार महादेव टोप्पो ने युवा कवयित्री डॉ पार्वती तिर्की के कविता संग्रह ‘फिर उगना’ में समाहित कविताओं पर परिचर्चा की. डॉ पार्वती तिर्की ने बताया कि आदिवासी समाज केवल जंगल और पहाड़ तक सीमित नहीं है. फिर उगना शीर्षक कुड़ुख भाषा के ‘ख़ोरेन’ शब्द को चरितार्थ करता है. इसमें आदिवासी समाज की गतिशीलता, जीवन दर्शन और जन्म से मृत्यु तक के गीत समाहित हैं. कुड़ुख भाषा में ‘ख’ अक्षर से कई बहुमूल्य शब्द बनाये गये हैं, जो ग्रामीणों के जनजीवन को बयां करते हैं. कविता लेखन में सांस्कृतिक परिदृश्य और सामाजिक जीवन के अलावा भी विषय है. इन्हें व्याकरण की समझ और विषय के प्रति जिज्ञासा होने पर ही लिखा जा सकता है.

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फिल्म बनाने से पहले खुद की जिज्ञासा शांत करनी होगी

लिटरेरी मीट के दूसरे दिन का समापन झारखंड के युवा फिल्मकार निरंजन कुजूर और सिराल मुर्मू के साथ परिचर्चा सत्र से हुआ. सत्र की शुरुआत शहाना चटर्जी ने फिल्मकारों के जीवन यात्रा से की. निरंजन ने बताया कि परिवार उन्हें डॉक्टर के रूप में स्थापित होते देखना चाहते थे. पर 12वीं के बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई को चुना. कोर्स में ढलने के बाद फिल्मों से परिचय हुआ. प्रसिद्ध फिल्मकारों की फिल्म ने उन्हें स्थानीय जीवन को बड़े पर्दे पर दर्शाने की सीख दी. वहीं, सिराल ने कहा कि फिल्म बनाने से पहले खुद की जिज्ञासा को शांत करने की जरूरत है. इस क्रम में नये विषयों से परिचय होगा, जो बेहतर फिल्म बनाने की प्रेरणा देंगे.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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