एचइसी में वेतन असमानता पर भड़के सप्लाई कर्मी, काम बंद कर जताया विरोध

एचइसी प्रबंधन द्वारा सप्लाई कर्मियों को मात्र 15 दिनों का वेतन भुगतान और स्थायी कर्मियों को एक माह का वेतन देने को लेकर कर्मियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

रांची. एचइसी प्रबंधन द्वारा सप्लाई कर्मियों को मात्र 15 दिनों का वेतन भुगतान और स्थायी कर्मियों को एक माह का वेतन देने को लेकर कर्मियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. सप्लाई कर्मियों ने एचइसी के दो प्लांट (एफएफपी और एचएमबीपी) के कई शॉप में विरोध स्वरूप सांकेतिक रूप से काम बंद कर दिया. वहीं कर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी भी की. कर्मियों का कहना है कि प्रबंधन स्थायी और सप्लाई कर्मियों के बीच भेदभाव कर रहा है. यही कारण है कि स्थायी कर्मियों को बकाया वेतन में से एक माह का भुगतान किया गया, जबकि सप्लाई कर्मियों को केवल 15 दिनों का वेतन दिया गया. वह भी एक दिन की देरी से. जबकि प्रबंधन बार-बार कहता है कि सप्लाई कर्मी एचइसी के उत्पादन की रीढ़ हैं. वहीं एचइसी सप्लाई संघर्ष समिति की बैठक सोमवार को एफएफपी शेड में होगी, जिसमें आगे की रणनीति की घोषणा की जायेगी.

सप्लाई कर्मियों का बकाया वेतन दें, नहीं तो होगा आंदोलन : सीटू

रांची. हटिया मजदूर यूनियन (सीटू) के अध्यक्ष भवन सिंह ने एचइसी प्रबंधन से सप्लाई कर्मियों के जुलाई 2023 का बकाया वेतन अविलंब भुगतान करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि अल्प वेतन भोगी मजदूरों को पूरा भुगतान नहीं देकर प्रबंधन आंदोलन को जानबूझ कर हवा दे रहा है. इससे एक बार फिर औद्योगिक अशांति होगी. प्रबंधन को भली-भांति जानकारी है कि स्थायी और सप्लाई कर्मियों का वेतन एकसाथ भुगतान करने पर चेयरमैन ने सहमति दी थी. उसका उल्लंघन करना उचित नहीं है. असंतोष को बढ़ावा देने के बजाय, प्रबंधन को उसे शांत करना चाहिए. श्री सिंह ने कहा कि अभी भी फार्म नहीं भरने के कारण कई कर्मियों का वेतन रुका हुआ है. वैसे लोग काम पर जा रहे हैं, लेकिन काम नहीं कर रहे हैं. स्थायी कर्मियों का प्रमोशन, छठ से पहले बोनस का भुगतान, सप्लाई मजदूरों को समझौते के अनुसार अक्तूबर 2023 से अप्रैल 2025 तक का बढ़ा हुआ डीए जोड़कर भुगतान किया जाये. अर्जित अवकाश 2023 से जोड़कर संचय करने का अधिकार दिया जाये. एएल छुट्टी का विवरण सभी मजदूरों को दिया जाये. अगर प्रबंधन मांगों पर संज्ञान नहीं लेता है तो यूनियन दिवाली से पहले सप्लाई और स्थायी मजदूरों की संयुक्त बैठक कर आंदोलन का निर्णय लेगी. प्रबंधन को उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, वेतन कटौती पर नहीं.

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