स्कूलों में चल रही सोशल ऑडिट में नियमों की अनदेखी, शिक्षक संघ ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

झारखंड में सोशल ऑडिट के दौरान नियमों की अनदेखी पर शिक्षक संघ ने जताई चिंता। गढ़वा, पलामू और रांची में निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

रांची: झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ ने राज्य के विभिन्न जिलों में विद्यालयों में चल रही सोशल ऑडिट प्रक्रिया को लेकर मिल रही शिकायतों पर गंभीर चिंता जतायी है. संघ ने आरोप लगाया है कि कुछ स्थानों पर सोशल ऑडिट के दौरान निर्धारित प्रक्रिया और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है.

संघ ने गढ़वा, पलामू, लातेहार और रांची समेत अन्य जिलों से प्राप्त शिकायतों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर साहू और प्रदेश महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने कहा कि सोशल ऑडिट का उद्देश्य विद्यालयों में पारदर्शिता, जनभागीदारी, सामाजिक उत्तरदायित्व और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है.संघ इस उद्देश्य का समर्थन करता है, लेकिन प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी की शिकायतें गंभीर हैं.

ग्रामसभा की हो रही अनदेखी

संघ के अनुसार कई मामलों में ग्रामसभा की आवश्यक सहभागिता और विचार-विमर्श के बिना मामलों को प्रखंड स्तर पर भेजा जा रहा है. संघ ने गढ़वा जिले से लगातार मिल रही शिकायतों को विशेष रूप से गंभीर बताया है. संघ का कहना है कि शिक्षकों एवं विद्यालयों को सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, अनावश्यक दबाव बनाने तथा निर्धारित प्रक्रिया से इतर कार्रवाई किये जाने से संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है. संघ ने स्पष्ट किया कि सोशल ऑडिट किसी भी स्थिति में शिक्षकों या विद्यालय प्रबंधन के उत्पीड़न का माध्यम नहीं बनना चाहिए.

सोशल ऑडिट एजेंसी के चयन की भी समीक्षा की मांग

संघ ने गढ़वा जिले में सोशल ऑडिट से संबंधित एजेंसी के चयन और उसकी कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा की भी मांग की है. संघ का कहना है कि यदि जांच में एजेंसी के स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और सोशल ऑडिट का काम सक्षम एजेंसी से कराया जाए.

संघ की प्रमुख मांगें

  • सभी जिलों में चल रही सोशल ऑडिट प्रक्रिया की राज्य स्तर पर समीक्षा हो सभी जिलों में सोशल ऑडिट के लिए स्पष्ट और समान प्रक्रिया सुनिश्चित हो.
  • ग्राम सभा की निर्धारित भूमिका और अधिकारों का पालन कराया जाये विद्यालय स्तर पर गठित टीम की राय और अनुशंसाओं को उचित महत्व दिया जाए.
  • गढ़वा, पलामू, लातेहार, रांची समेत अन्य जिलों की शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच हो पर्याप्त तथ्य और दस्तावेजी साक्ष्य के बिना किसी शिक्षक या विद्यालय के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी या कार्रवाई न हो.
  • शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन को अपना पक्ष रखने और स्पष्टीकरण देने का उचित अवसर दिया जाये सोशल ऑडिट में केवल निर्धारित नियमों के तहत आवश्यक अभिलेख ही मांगे जाए.
  • प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रभावी व्यवस्था बनायी जाए.


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By Sunil jha

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