सदर अस्पताल की लैब को एनएबीएल की मान्यता, जांच रिपोर्ट पर बढ़ेगा भरोसा

दर अस्पताल, रांची की पैथोलॉजी लैब को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) की मान्यता मिल गयी है.

बिपिन सिंह, रांची. सदर अस्पताल, रांची की पैथोलॉजी लैब को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज (एनएबीएल) की मान्यता मिल गयी है. अस्पताल प्रबंधन को इसका प्रमाणपत्र भी प्राप्त हो चुका है. यह उपलब्धि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे न केवल मरीजों को उच्च गुणवत्ता की जांच सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि निदान और उपचार की सटीकता में भी सुधार आयेगा. यह प्रमाणन वर्ष 2029 तक मान्य रहेगा. नवंबर 2022 में अस्पताल के नये भवन का हैंडओवर लेने के बाद से लैब को लगातार अपग्रेड किया जा रहा था. राज्य के सरकारी जिला अस्पतालों में अब तक केवल सदर अस्पताल को ही यह मान्यता प्राप्त हुई है. आवेदन के बाद एनएबीएल की सेंट्रल टीम ने लैब की दस श्रेणियों में जांच कर प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी की थी. वर्तमान में उपाधीक्षक के पद पर कार्यरत कंसल्टेंट पैथोलॉजिस्ट डॉ बिमलेश सिंह ने अपनी टीम के साथ मिलकर आवश्यक गुणवत्ता सुधार की दस प्रक्रियाएं पूरी करायीं. इसके बाद लैब अब देश के अन्य बड़े मेडिकल संस्थानों की तरह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप जांच सुविधा देने में सक्षम हो गयी है. बता दें कि रिम्स के माइक्रोबायोलॉजी लैब को पहली बार आठ अक्तूबर 2024 को एनएबीएल की मान्यता मिली थी. अब सदर अस्पताल की लैब भी उसी श्रेणी में शामिल हो गयी है. इधर, सदर अस्पताल, रांची की लैब को एनएबीएल की मान्यता मिलने पर एनएचएम निदेशक शशि प्रकाश झा, स्टेट नोडल ऑफिसर क्वालिटी कंट्रोल डॉ रंजीत और सिविल सर्जन डॉ प्रभात कुमार ने बधाई दी.

मरीजों को बार-बार नहीं करानी होगी जांच, बचेंगे पैसे

एनएबीएल की मुहर लगने के बाद सदर अस्पताल की लैब में जांच करानेवाले मरीजों को सीधा लाभ मिलेगा. यहां की रिपोर्ट को अन्य संस्थान भी सटीक मानेंगे, जिससे मरीजों को दोबारा जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे आर्थिक बोझ भी कम होगा.

सदर अस्पताल के ओपीडी में हर माह आ रहे 59,500 मरीज

सदर अस्पताल के ओपीडी में एक महीने में औसतन 59,500 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं. जुलाई में यह संख्या 59,640 रही. पैथोलॉजी जांच कराने वालों की संख्या 1,58,766 रही. नवंबर 2022 में यह आंकड़ा करीब 30 हजार था, जो अब दोगुना से अधिक हो चुका है.

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