RIMS Land Scam, रांची (अमन तिवारी की रिपोर्ट): राजधानी रांची के बरियातू स्थित रिम्स की जमीन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. ब्यूरो ने इस मामले में संलिप्त तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) समेत तीन अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है. इसके लिए विभागीय स्तर पर पत्राचार की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. एसीबी के अनुसार, जैसे ही अनुमति मिलेगी, इन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.
राजस्व अधिकारियों की तिकड़ी निशाने पर
जिन अधिकारियों पर केस चलाने की मांग की गई है, उनमें उस समय के सीओ राजेश कुमार, अंचल निरीक्षक श्याम किशोर और राजस्व कर्मचारी मनोज कुमार शामिल हैं. एसीबी की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों को सरकारी रिकॉर्ड में स्थान दिलाने में मदद की थी. ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य रसूखदारों के नाम भी इस सिंडिकेट में सामने आ सकते हैं.
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फर्जी वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी का खेल
एसीबी इस मामले की प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) पूरी कर चुकी है, जिसमें भारी अनियमितताएं पाई गई हैं. इस घोटाले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. गिरफ्तार आरोपियों में एक नामी बिल्डर, फर्जी वंशावली तैयार करने वाले दो भाई और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिये अवैध लेन-देन करने वाला एक व्यक्ति शामिल है. आरोपियों ने मिलकर रिम्स से सटी कीमती जमीन को फर्जी कागजात के सहारे अपना बताकर बेचने की कोशिश की थी.
सेवानिवृत्त होने के बाद भी नहीं बचेंगे पूर्व सीओ
खास बात यह है कि मुख्य आरोपी तत्कालीन सीओ राजेश कुमार वर्तमान में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त (Retired) हो चुके हैं. हालांकि, कानून के अनुसार भ्रष्टाचार के मामलों में सेवानिवृत्ति के बावजूद अभियोजन की कार्रवाई की जा सकती है. एसीबी ने उनके कार्यकाल के दौरान हुए सभी फैसलों और जमीन हस्तांतरण की फाइलों को खंगाला है. ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह पद पर हो या सेवामुक्त हो चुका हो.
