वंदे भारत कितनी सस्ती, कितनी महंगी : रांची से दीनदयाल का भाड़ा प्रति किमी 4.39 रुपए, बनारस से 40.59 रुपए

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सबसे अत्याधुनिक ट्रेन है, तो सबसे महंगी ट्रेन भी है. आइए, आपको बताते हैं कि इस ट्रेन में चढ़ना कितना सस्ता या कितना महंगा है.

वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे अत्याधुनिक सेमी हाई स्पीड ट्रेन है. हर कोई इसमें एक बार जरूर यात्रा करना चाहता है. लेकिन, इसका किराया इतना अधिक है कि आमलोगों की जेब काफी ढीली हो जाती है. वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन से यात्रा करना कितना सस्ता या कितना महंगा पड़ता है, इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो एक बार इस रिपोर्ट को जरूर पढ़ें. खासकर रांची और बनारस के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के बारे में.

रांची-वाराणसी-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस का रूट क्या है?

रांची-वाराणसी-रांची वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन रांची से मुरी, बोकारो स्टील सिटी, कोडरमा, गया, सासाराम, पंडित दीनदयाल उपाध्याय होते हुए बनारस (वाराणसी) पहुंचेगी. वहीं, बनारस से लौटने के दौरान यह ट्रेन दीनदयाल उपाध्याय, सासाराम, गया, कोडरमा, बोकारो स्टील सिटी, मुरी होते हुए रांची पहुंचेगी.

ईसी में 805 रुपए, सीसी में 420 रुपए है रांची से मुरी का किराया

अगर कोई व्यक्ति रांची से मुरी तक की यात्रा करता है, तो उसे एग्जीक्यूटिव क्लास में 805 रुपए और चेयर कार में 420 रुपए किराए का भुगतान करना होता है. इस तरह देखें, तो एग्जीक्यूटिव क्लास (ईसी) में प्रति किलोमीटर 12.98 रुपए का भुगतान करना पड़ता है, जबकि चेयर कार (सीसी) में 6.77 रुपए प्रति किलोमीटर की दर से.

रांची से दीनदयाल उपाध्याय का टिकट कितने का है

वहीं, अगर कोई व्यक्ति रांची से दीनदयाल उपाध्याय या वाराणसी तक की यात्रा करना चाहता है, तो उसे क्रमश: 2280 रुपए और 2325 रुपए का टिकट कटाना पड़ता है. इस तरह इन दोनों स्टेशनों के लिए प्रति किलोमीटर किराया क्रमश: 4.39 रुपए और 4.34 रुपए बैठता है.

वाराणसी से दीनदयाल का किराया कितना है?

अगर आप वाराणसी से दीनदयाल तक की ही यात्रा करना चाहते हैं, तो महज 17 किलोमीटर के लिए आपको प्रति किलोमीटर 40.59 रुपए की दर से भुगतान करना पड़ता है. जी हां, बनारस से दीनदयाल तक का किराया 690 रुपए है, जबकि इन दोनों स्टेशनों की दूरी महज 17 किलोमीटर है. ऐसे में एक किलोमीटर का किराया 40.59 रुपए बैठता है. चेयर कार में यही किराया 365 रुपए है, जो प्रति किलोमीटर 21.47 रुपए बैठता है.

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चेयर कार में रांची से वाराणसी का कितना है किराया

चेयर कार में अगर आप रांची से वाराणसी या वाराणसी से रांची की यात्रा करते हैं, तो आपको 1160 रुपए किराया देना होगा. दोनों स्टेशनों के बीच की दूरी 536 किलोमीटर है. इस प्रकार चेयर कार के यात्रियों को प्रति किलोमीटर 2.16 रुपए का भुगतान करना होगा.

वंदे भारत में यात्रियों को कौन-कौन से चार्जेज देने पड़ते हैं

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रियों को कई तरह के चार्जेज भी देने पड़ते हैं. अगर आप एग्जीक्यूटिव क्लास का टिकट कटाते हैं, तो आपको बेस प्राइस के अलावा रिजर्वेसन चार्ज, सुपरफास्ट चार्ज, कैटरिंग चार्ज (अगर आप विकल्प चुनते हैं), कैटरिंग चार्ज (अगर आप विकल्प नहीं चुनते हैं, तो भी यह चार्ज देना पड़ता है) और जीएसटी देना पड़ता है.

वंदे भारत में रिजर्वेशन चार्ज कितना लगता है?

भारतीय रेलवे के मुताबिक, एग्जीक्यूटिव क्लास में रिजर्वेशन चार्ज 60 रुपए है, तो चेयर कार में 40 रुपए, सुपरफास्ट चार्ज ईसी के लिए 75 रुपए और सीसी के लिए 45 रुपए देना होता है. कैटरिंग चार्जेज (अगर आप विकल्प चुनते हैं) एग्जीक्यूटिव क्लास के रांची से बनारस के यात्रियों के लिए 155 रुपए से 399 रुपए तक, चेयरकार में 122 से 344 रुपए का भुगतान करना होता है.

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ईसी हो या सीसी सबको देना होता है 20 रुपए कैटरिंग चार्ज

अगर आप कैटरिंग की सुविधा नहीं लेना चाहते हैं, तो भी आपको 20 रुपए का भुगतान करना होगा. यह ईसी और सीसी दोनों के यात्रियों के लिए एक समान है. इन सबके अलावा आपको 5 फीसदी जीएसटी का भी भुगतान करना होता है. ट्रेन का बेस फेयर अलग-अलग स्टेशनों के लिए अलग-अलग है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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