रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने आरआरडीए और रांची नगर निगम में नक्शा स्वीकृति में विलंब और वसूली के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज याचिका पर सुनवाई की. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने पक्षों को सुनने के बाद नगर निगम से पूछा कि जब टेबुलर चार्ट में विस्तृत जानकारी मांगी गयी थी, तो उसे क्यों नहीं दिया गया. 19 अगस्त के आदेश के अनुसार भवनों के नक्शा से संबंधित विस्तृत जानकारी टेबुलर चार्ट में देने का निर्देश दिया गया था. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने सात अक्तूबर की तिथि निर्धारित की है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि जब बिल्डिंग बॉयलॉज में भवन का नक्शा डिम्ड सेंक्शन (स्वत: स्वीकृत) का प्रावधान है, तो अब तक कितने भवनों का नक्शा इस प्रक्रिया से स्वीकृत किया गया है. उसकी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया था. खंडपीठ ने कहा कि रांची नगर निगम अपने सभी कार्यों में पारदर्शिता लाये और अपनी वेबसाइट पर भवन नक्शा से संबंधित सारी जानकारी प्रदर्शित करे. नक्शा की स्थिति, किस स्टेज में है, क्या त्रुटि है, क्यों लंबित है- इन सभी बिंदुओं की जानकारी वेबसाइट पर होनी चाहिए ताकि लोग देख कर त्रुटियों का निराकरण कर सकें. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वर्ष 2023 से अब तक कितने भवनों का नक्शा जमा हुआ, कितने डिम्ड सेंक्शन किये गये, कितने स्वीकृत हुए और कितने लंबित हैं, इन सभी की विस्तृत जानकारी टेबुलर चार्ट के रूप में शपथ पत्र में दायर की जाये. इससे पूर्व रांची नगर निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने पक्ष रखा, जबकि मामले के एमीकस क्यूरी अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने पैरवी की. वहीं आरआरडीए की ओर से अधिवक्ता प्रशांत कुमार सिंह ने पक्ष रखा. उल्लेखनीय है कि रांची नगर निगम में नक्शा पास करने में देरी और अवैध वसूली संबंधी खबर को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लिया था और स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने यह भी पूछा था कि अगर तय समय सीमा के भीतर भवन का नक्शा पास नहीं होता है, तो क्या उसे स्वत: स्वीकृत माना जा सकता है. इसकी जानकारी देने का निर्देश भी दिया गया था.
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