Jharkhand: पयाल के पेड़ लगाकर खूब करें कमाई, अंग्रेजों के जमाने से ग्रामीण आदिवासियों की आय का रहा है जरिया

फल की गुठली से निकली मींगी और छाल दोनों उपयोगी हैं. चिरौंजी का उपयोग आमतौर पर हलवा, लड्डू, खीर आदि बनाने में सूखे मेवे के रूप में होता है. सौंदर्य प्रसाधनों में भी इसका इस्तेमाल होता है. इसका पेड़ लगाना बेहद आसान है.

झारखंड में कई तरह के फल-फूल के पेड़-पौधे पाये जाते हैं, जो जंगलों में या उसके आसपास रहने वाले लोगों के लिए वर्षों से आय का जरिया रहे हैं. ऐसा ही एक फल है पयाल. पयाल का फल 1600 से 1800 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है. इस स्वादिष्ट फल के कई औषधीय गुण भी हैं. वीर्य बढ़ाने के साथ-साथ यह हृदय को भी स्वस्थ रखता है. स्निग्ध, वात-पित्त शामक है. शारीरिक दुर्बलता या रुग्णावस्था में इसका उपयोग किया जाता है.

गुठली से निकली मींगी और छाल दोनों उपयोगी

झारखंड की राजधानी रांची स्थित वन उत्पादकता संस्थान के बीडी पंडित ने बताया कि इस वृक्ष के फल की गुठली से निकली मींगी और छाल दोनों उपयोगी हैं. चिरौंजी का उपयोग आमतौर पर हलवा, लड्डू, खीर आदि बनाने में सूखे मेवे के रूप में होता है. सौंदर्य प्रसाधनों में भी इसका इस्तेमाल होता है. इसका पेड़ लगाना बेहद आसान है. उन्होंने कहा कि बीज द्वारा आसानी से इसके पौधे तैयार किये जा सकते हैं.

पियाल/पयाल/प्रियाल के हैं कई औषधीय गुण

उन्होंने बताया कि चिरौंजी जो फलों की गुठली फोड़कर निकाली जाती है, उसे बोलचाल की भाषा में पियाल, प्रियाल या चारोली या चिरौंजी भी कहते हैं. इसके कई औषधीय गुण हैं. यह एक मध्यम आकार का वृक्ष होता है, जो पर्णपाती वनों में पाया जाता है. भारत में झारखंड, बिहार के अलावा ओड़िशा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश में भी इसके वृक्ष विशेष रूप से होते हैं.

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बहुत स्वादिष्ट होते हैं पके पयाल

श्री पंडित ने बताया कि पयाल के पके हुए फल बहुत स्वादिष्ट होते हैं. चिरौंजी या चारोली पयार या पयाल नामक वृक्ष के फलों की गिरी है, जो खाने में बेहद स्वादिष्ट होते हैं. भारतीय पकवानों में इसका खूब इस्तेमाल होता है. खासकर मिठाइयां, खीर और सेवई इत्यादि बनाने में. संवर्द्धक और पौष्टिक मानकर सूखे मेवों में भी इसे अहम स्थान दिया गया है.

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By Mithilesh Jha

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