रांची. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चाैधरी की अदालत ने चुनाव याचिका पर सुनवाई की. इस दाैरान प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने याचिका को एडमिट कर लिया तथा प्रतिवादी विधायक (मंत्री) योगेंद्र प्रसाद व रिटर्निंग अफसर को नोटिस जारी किया. अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दायर करने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई अब छह सप्ताह के बाद होगी. इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष रहते हुए योगेंद्र प्रसाद ने नामांकन दाखिल किया था, जो लाभ का पद है और इस बात को उन्होंने रिटर्निंग अफसर के सामने छुपा लिया. नामांकन दाखिल करने व स्क्रूटनी होने तक उनका त्याग पत्र स्वीकृत नहीं हुआ था. स्क्रूटनी के समय इस बात को लेकर रिटर्निंग अफसर के समक्ष आपत्ति भी दर्ज करायी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी. इस मामले को पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक दबाये रखा गया. प्रतिवादी के नामांकन को गलत तरीके से मंजूरी दे दी गयी. निर्वाची पदाधिकारी, सहायक निर्वाची पदाधिकारी और पर्यवेक्षक उस स्थल से गायब हो गये और सीसीटीवी कैमरा भी बंद कर दिया गया. उच्च अधिकारी व राज्य सरकार के दबाव में नामांकन को गलत तरीके से स्वीकृत कर लिया गया. स्क्रूटनी अवधि समाप्त होने के बाद त्याग पत्र की स्वीकृति मोबाइल द्वारा निर्वाची पदाधिकारी को दिखाया गया था, जो नियम संगत नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो ने चुनाव याचिका दायर की है.
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