जिला प्रशासन की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी मामले को संज्ञान में लिया है.
By Prabhat Khabar News Desk | Updated at :
पिपरवार
चतरा जिला प्रशासन ने पिपरवार में कोयला ट्रांसपोर्टिंग के कारण सड़कों पर उड़नेवाले धूलगर्द मामले को गंभीरता से लिया है. जिला प्रशासन की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी मामले को संज्ञान में लिया है. इसके बाद सीसीएल प्रबंधन धूलगर्द को नियंत्रित करने के लिए हरकत में आया है. बचरा में कोयला ट्रांसपोर्टिंग सड़क पर शुक्रवार को प्रत्येक घंटे पानी का छिड़काव किया जा रहा है. कोयला लदे डंपरों पर तिरपाल बांधकर ढुलाई की जा रही है. हालांकि प्रबंधन की सक्रियता के बावजूद जिला प्रशासन सीसीएल को बख्शने के मूड में नहीं है. जिला प्रशासन की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की टीम शुक्रवार को सीएचपी-बचरा साइडिंग ट्रांसपोर्टिंग रोड, बचरा साइडिंग, आवासीय कॉलोनियों, अशोक-आरसीएम ट्रांसपोर्टिंग रोड व ग्रामीण इलाकों का दौरा की है.
सिमरिया एसडीओ ने की कार्रवाई
गौरतलब हो कि लोकसभा चुनाव को लेकर बूथ निरीक्षण के क्रम में सिमरिया एसडीओ 29 मार्च को ट्रांसपोर्टिंग रोड के बगल स्थित राजकीयकृत 10 प्लस टू विद्यालय बचरा आये थे. उनकी नजर नवनिर्मित तीन मंजिला स्कूल भवन की दीवारों पर जमी धूलगर्द पर पड़ गयी. उक्त स्कूल के अतिरिक्त ट्रांसपोर्टिंग रोड किनारे स्थित आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र तथा ग्रामीणों के आवासीय मकानों पर भी कोयले की धूल की मोटी परत जमी हुई देखी. उन्होंने सीएचपी से बचरा साइडिंग तक बिना तिरपाल ढके डंपरों को कोयला ढुलाई करते देखा. ट्रांसपोर्टिंग रोड पर पानी का छिड़काव नहीं होने से उड़ रहे धूलगर्द से उन्हें भी परेशानी हुई. एसडीओ ने उड़ रहे धूलगर्द को गंभीरता से लिया और ट्रांसपोर्टिंग सड़क का जायजा लिया. इसके बाद एसडीओ ने जिला के परिवहन विभाग, जिला खनन विभाग व राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को पत्र लिख कर मामले की शिकायत करते हुए ग्रामीणों में धूलगर्द से सिलकोसिस नामक बीमारी होने की आशंका जतायी है.
एसडीओ की कार्रवाई से ग्रामीणों में हर्ष
एसडीओ की इस कार्रवाई से ग्रामीणों में हर्ष है. ग्रामीणों की शिकायत है कि डंपरों के परिचालन में अब भी नियमों की अनदेखी की जा रही है. डंपर में लदा कोयला तिरपाल से अच्छी तरह ढका नहीं रहता है. कई डंपरों में डाला का ढक्कन खुला रहता है. जिससे रोड में कोयला गिरता रहता है. सड़क किनारे कोयला का ढेर जमा रहता है, जिसे प्रबंधन साफ नहीं कराता है. ग्रामीणों ने अन्य क्षेत्रों की तरह ट्रांसपोर्टिंग रोड की नियमित सफाई की मांग की है.
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