चुनाव खत्म, अब जनता पर बोझ शुरू, मोदी सरकार का असली चेहरा सामने: विनोद पांडेय

Ranchi News: झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने मोदी सरकार पर चुनाव तक आर्थिक सच्चाई छिपाने और चुनाव खत्म होते ही जनता को त्याग करने का उपदेश देने का आरोप लगाया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट 

Ranchi News: झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देशवासियों को पेट्रोल बचाने, सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्राएं रोकने, विदेशी सामान छोड़ने और घर से काम करने की सलाह दे रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय संकट आज बताया जा रहा है, उसकी शुरुआत आज नहीं हुई है. युद्ध और वैश्विक तनाव की स्थिति पहले दिन से बनी हुई थी. तब प्रधानमंत्री ने देश से त्याग और कटौती की अपील क्यों नहीं की? 

चुनाव के कारण सच्चाई छिपायी गई

विनोद पांडेय ने कहा कि देश की जनता यह अच्छी तरह समझ रही थी कि उस समय पांच राज्यों के चुनाव सामने थे, इसलिए सरकार सच्चाई छिपा रही थी. चुनाव खत्म होते ही अब जनता को कम खर्च करो, कम घूमो, कम खरीदो का ज्ञान दिया जा रहा है. इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाया. भारत की विदेश नीति हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है. जिन देशों को कभी भारत का सबसे भरोसेमंद मित्र बताया जाता था, वही देश आज भारत से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं. सरकार अमेरिका के दबाव के आगे झुकती नजर आ रही है और उसका असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जिंदगी पर पड़ रहा है.

सरकार खुलकर जनता से त्याग मांग रही है 

मोदी सरकार ने विश्वगुरु, न्यू इंडिया और पांच ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी जैसे बड़े-बड़े सपने दिखाए, लेकिन हकीकत यह है कि आज आम आदमी की कमर टूट चुकी है. महंगाई लगातार बढ़ रही है, बेरोजगारी रिकॉर्ड स्तर पर है, रुपये की कीमत कमजोर हो रही है और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर जनता को निचोड़ा जा रहा है. आर्थिक नीति पहले ही आम लोगों को तोड़ चुकी थी, अब सरकार खुलकर जनता से त्याग मांग रही है. 

जनता के साथ अन्याय

विनोद पांडेय ने कहा कि विडंबना यह है कि एक तरफ जनता को विदेश यात्राएं और डेस्टिनेशन वेडिंग रोकने की सलाह दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री खुद यूरोप दौरों पर निकल जाते हैं. अगर वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग इतनी जरूरी और प्रभावी हैं, तो क्या सरकार खुद उसका पालन नहीं कर सकती? झारखंड मुक्ति मार्च मानता है कि देश को भाषण नहीं, जवाब चाहिए. जनता टैक्स भी दे, महंगाई भी सहे, बेरोजगारी भी झेले और अंत में उपदेश भी सुने, यह लोकतंत्र नहीं, जनता के साथ अन्याय है. 

इसे भी पढ़ें: गुमला के कामडारा अस्पताल से गायब थीं डॉक्टर, इलाज के अभाव में एंबुलेंस चालक की मौत

इसे भी पढ़ें: रजरप्पा के छिन्नमस्तिका मंदिर से हटाए गए दुकानदारों के पुनर्वास पर हाईकोर्ट सख्त, दिए निर्देश

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Sweta Vaidya

श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. पिछले करीब दो महीनों से वे झारखंड बीट पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. इस दौरान वे राज्य से जुड़ी ताजा खबरों, लोगों से जुड़े मुद्दे और जरूरी जानकारियों पर आधारित स्टोरीज तैयार कर रही हैं. इससे पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर रोचक और उपयोगी आर्टिकल लिखे. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >