पहली बार होगा फॉरेस्ट कांग्रेस का आयोजन, झारखंड करेगा होस्ट

Ranchi News: झारखंड में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के फॉरेस्ट कांग्रेस का आयोजन होगा. वन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. आयोजन में देशभर के विशेषज्ञ वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और वन्यजीव संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे. आइसीएफआरई देहरादून को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के फॉरेस्ट कांग्रेस का आयोजन होने जा रहा है. इस महत्वपूर्ण आयोजन की तैयारी वन विभाग की ओर से शुरू कर दी गयी है. कार्यक्रम के जरिए वन, पर्यावरण, वन्यजीव और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर देशभर के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाने की योजना बनायी गयी है. प्रस्तावित आयोजन अगस्त-सितंबर महीने में किया जा सकता है.

आइसीएफआरई को बनाया गया नॉलेज पार्टनर

फॉरेस्ट कांग्रेस के आयोजन के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट रिसर्च एंड एजुकेशन (आइसीएफआरई), देहरादून को नॉलेज पार्टनर बनाया गया है. आयोजन में तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ सलाह भी इसी संस्थान की ओर से दी जाएगी. वन विभाग का मानना है कि इस आयोजन से झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर वन और पर्यावरण से जुड़े अनुसंधान एवं तकनीकी जानकारियों का लाभ मिलेगा. इसके साथ ही राज्य में चल रहे वन संरक्षण और पर्यावरणीय कार्यों को भी नई दिशा मिलेगी.

देशभर के विशेषज्ञ होंगे शामिल

फॉरेस्ट कांग्रेस में वन एवं पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अधिकारियों को आमंत्रित करने की योजना है. आयोजन के दौरान वन संरक्षण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा होगी. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभिन्न राज्यों के अनुभवों और शोध कार्यों को साझा कर व्यावहारिक समाधान खोजने का प्रयास भी किया जाएगा.

जंगलों तक सीमित नहीं रहा वन विभाग: संजीव कुमार

राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) संजीव कुमार ने कहा कि झारखंड में पहली बार इस तरह का आयोजन प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि अब वन विभाग केवल जंगलों तक सीमित नहीं रह गया है. उन्होंने बताया कि वन्य प्राणी संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संतुलन जैसे विषय वन विभाग के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं. इन क्षेत्रों में लगातार अनुसंधान और नए प्रयोग हो रहे हैं. इन शोधों और अनुभवों को लोगों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं पर व्यापक विचार-विमर्श हो सके.

स्थायी फोरम बनाने पर भी होगा विचार

संजीव कुमार ने कहा कि फॉरेस्ट कांग्रेस के दौरान एक स्थायी फोरम बनाने पर भी विचार किया जाएगा. इस फोरम के जरिए नियमित रूप से फॉरेस्ट कांग्रेस आयोजित की जा सकेगी और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा. उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न राज्यों को एक-दूसरे के अनुभवों और अनुसंधानों से सीखने का अवसर मिलेगा. साथ ही वन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने में भी मदद मिलेगी.

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पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया मंच

वन विभाग का मानना है कि फॉरेस्ट कांग्रेस के आयोजन से पर्यावरण संरक्षण और वन प्रबंधन को नया मंच मिलेगा. विशेषज्ञों के विचार और अनुसंधान राज्य की नीतियों को मजबूत बनाने में सहायक होंगे. इसके साथ ही झारखंड को वन और पर्यावरण क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी मिल सकती है.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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