रांची : झामुमो ने देश में परिसीमन को लेकर तैयार किये जा रहे ड्राफ्ट पर सवाल उठाया है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा अपनी सत्ता को ध्यान में रख कर परिसीमन करना चाहती है. इसका पार्टी हर स्तर पर विरोध करेगी. हरमू स्थित पार्टी के कैंप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 2026 के बाद पूरे देश में परिसीमन होगा. इसके पहले दो बार 1976 और 2008 में परिसीमन हुआ था. दोनों समय लोकसभा की कुल संख्या 543 ही रही. क्योंकि संविधान का आर्टिकल 81 स्पष्ट रूप से कहता है कि देश के सांसद में अधिकतम 530 सदस्य होंगे और केंद्र शासित राज्य 20 होगा. यानि लोकसभा में सदस्यों की संख्या 550 होगी.
लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर होगी 846 सुप्रियो भट्टाचार्य
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि अभी ड्रॉफ्ट को लेकर जो बात सामने आ रही है, वह चौंकाने वाला है. इसके अनुसार अब लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़कर 846 हो जायेगी. सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 2008 में हुए परिसीमन से पहले झामुमो ने आंदोलन किया था. इसके बाद सरकार ने झारखंड और नॉर्थ ईस्ट को इससे अलग रखा, क्योंकि झारखंड के प्रतिनिधित्व का प्रतिशत में आघात होने वाला था. लेकिन अब जो बात सामने आ रही है, उसमें वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार देश के सभी राज्यों में परिसीमन किया जायेगा.
पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी : Mani Shankar Aiyar: ‘नीच’ ‘चायवाला’ और ‘नालायक’, मणिशंकर अय्यर जब बोले हुआ विवाद
किस राज्य में कितनी सीटें हो जाएगी सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया
सुप्रियो भट्टाचार्य ने आगे कहा कि केंद्र सरकार 25 वर्ष में हुए बदलाव को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही है. 2011 की जनगणना रिपोर्ट है, लेकिन उसका प्रकाशन नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि नये परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में 80 सांसद है, जो बढ़ कर 143 हो जाएंगे, बिहार में सांसदों की संख्या 40 से बढ़ कर 79, मध्यप्रदेश में 29 से बढ़ कर 52, गुजरात में 26 से बढ़ कर 43, राजस्थान में 25 से बढ़ कर 50, महाराष्ट्र में 48 से बढ़ कर 76, तामिलनाड्डू में 39 से बढ़ कर 49, कनाटक में 28 से बढ़ कर 41, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 42 से बढ़ कर 54, झारखंड में 14 से बढ़ कर 24 की बात चल रही है. इसके हिसाब से 10 राज्य की कुल सीट बढ़ कर 647 हो जायेगी. यह कुल सीट का लगभग 77 फीसदी है. केंद्र सरकार की ओर से पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत को वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है.
