Jharkhand High Court: जैन धर्म के प्रसिद्ध तीर्थस्थल पारसनाथ पहाड़ और इसके आसपास के क्षेत्र को संरक्षित करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने ज्योत संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सुना. अदालत ने पारसनाथ पहाड़ और आसपास के इलाके में किये जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर गिरिडीह के उपायुक्त को महत्वपूर्ण निर्देश दिया है.
निर्माण की वैधता जांचने का निर्देश
खंडपीठ ने गिरिडीह के उपायुक्त को पारसनाथ पहाड़ और आसपास के क्षेत्र का स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया जाये कि संबंधित निर्माण कार्य वैध हैं या अवैध. उपायुक्त को निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर 3 सितंबर तक हाइकोर्ट में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट में स्पष्टता नहीं
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि पारसनाथ पहाड़ पर किये गये निर्माण कार्यों को लेकर गिरिडीह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से पहले ही रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है. हालांकि, खंडपीठ ने पाया कि रिपोर्ट में निर्माण कार्यों की वैधता को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती है. अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पहाड़ और आसपास के इलाके में किये गये निर्माण संबंधित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं. केवल निर्माण का उल्लेख कर देना पर्याप्त नहीं है. निर्माण वैध है या अवैध, इसकी स्पष्ट जानकारी आवश्यक है. इसी वजह से कोर्ट ने अब गिरिडीह के उपायुक्त को स्वयं स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है.
स्थल निरीक्षण के बाद देनी होगी विस्तृत रिपोर्ट
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार गिरिडीह उपायुक्त को पारसनाथ पहाड़ और आसपास के क्षेत्र में जाकर निर्माण कार्यों का निरीक्षण करना होगा. निरीक्षण के दौरान निर्माण की स्थिति के साथ-साथ उसकी वैधानिकता की भी जांच करनी होगी. उपायुक्त को यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक अनुमति और स्वीकृति प्राप्त की गयी है या नहीं. इसके बाद प्रशासन को अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी. रिपोर्ट के आधार पर हाइकोर्ट आगे इस मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर सकता है.
पारसनाथ की धार्मिक और पर्यावरणीय महत्ता
पारसनाथ पहाड़ जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. धार्मिक महत्व के साथ यह क्षेत्र प्राकृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में पहाड़ और उसके आसपास अनियंत्रित या नियमों के विपरीत निर्माण को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं. जनहित याचिका के माध्यम से पारसनाथ पहाड़ के संरक्षण और क्षेत्र में होने वाले निर्माण कार्यों को लेकर अदालत का ध्यान आकृष्ट कराया गया है. अब हाइकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर स्थल निरीक्षण और निर्माण की वैधता की जांच की जायेगी.
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10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने गिरिडीह उपायुक्त को निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी. उस दिन अदालत के समक्ष उपायुक्त की रिपोर्ट रखी जायेगी, जिसके आधार पर पारसनाथ पहाड़ और आसपास के क्षेत्र में निर्माण को लेकर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है. फिलहाल, हाइकोर्ट का निर्देश इस बात पर केंद्रित है कि पारसनाथ पहाड़ जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल पर किये गये निर्माण की वास्तविक स्थिति और उसकी वैधता स्पष्ट रूप से सामने आये. यानी कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, इस बार कोर्ट ने प्रशासन को मौके पर जाकर हकीकत देखने को कहा है.
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