Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने बच्चों के बौद्धिक विकास, सुरक्षा और संवेदनशील सहायता से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है. बच्चों की कस्टडी, माता-पिता के बच्चों से मिलने के अधिकार और पेरेंटिंग से जुड़े मामलों में एक समान न्यायिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हाइकोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था लागू की है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
स्थायी नियम बना रही हाईकोर्ट की रूल्स कमेटी
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जब तक झारखंड हाइकोर्ट की रूल्स कमेटी इस विषय पर स्थायी नियम तैयार नहीं कर लेती, तब तक कलकता हाइकोर्ट द्वारा तैयार की गयी चाइल्ड एक्सेस एंड कस्टडी गाइडलाइन पैरेंटिंग प्लान-2025 को झारखंड में अंतरिम रूप से अपनाया जायेगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों की कस्टडी और माता-पिता के मुलाकात से जुड़े मामलों में संबंधित अदालतों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है. खासकर वैवाहिक और पारिवारिक विवादों में बच्चों से जुड़े मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हाइकोर्ट ने इस दिशा में प्रक्रिया शुरू की है.
न्यायालयों के न्यायिक विवेक पर नहीं लगेगी रोक
हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जारी की गयी गाइडलाइन केवल मार्गदर्शक के रूप में काम करेगी. इसका उद्देश्य किसी भी न्यायालय के न्यायिक विवेक को सीमित करना नहीं है. संबंधित अदालतें मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अपने न्यायिक अधिकार और विवेक का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल कर सकेंगी. खंडपीठ ने कहा कि गाइडलाइन को केवल इसलिए प्रसारित किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर न्यायालय इससे सहायता ले सकें. यानी यह कोई ऐसी कठोर व्यवस्था नहीं होगी, जिसे हर मामले में परिस्थितियों की परवाह किये बिना लागू करना जरूरी हो. बच्चों की सुरक्षा और उनके हित को ध्यान में रखते हुए अदालतें प्रत्येक मामले पर अलग से विचार कर सकेंगी.
रूल्स कमेटी के बाद फुलकोर्ट बनायेगा स्थायी नियम
झारखंड हाइकोर्ट ने बताया कि राज्य में बच्चों की कस्टडी और पेरेंटिंग प्लान को लेकर अभी तक कोई विशेष गाइडलाइन तैयार नहीं की गयी है. ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ने को देखते हुए इस विषय को हाइकोर्ट की रूल्स कमेटी के समक्ष भेजने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. रूल्स कमेटी इस विषय पर विचार करेगी और इसके बाद स्थायी नियम तैयार किये जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. बाद में फुलकोर्ट भी प्रस्तावित नियमों पर विचार करेगा. स्थायी नियम लागू होने तक कलकता हाइकोर्ट की गाइडलाइन अंतरिम व्यवस्था के रूप में प्रभावी रहेगी.
जिला अदालतों तक पहुंचेगी गाइडलाइन
खंडपीठ ने हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है. उन्हें कहा गया है कि संबंधित गाइडलाइन राज्य के सभी जिला जजों, फैमिली कोर्ट, मजिस्ट्रेट और उन अन्य अदालतों को भेजी जाये, जहां बच्चों की कस्टडी, वैवाहिक विवाद अथवा पारिवारिक विवाद से संबंधित मामलों की सुनवाई होती है. इससे निचली अदालतों को बच्चों की कस्टडी और माता-पिता के मिलने के अधिकार से जुड़े मामलों में एक संदर्भ उपलब्ध हो सकेगा. हालांकि, अंतिम निर्णय संबंधित मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अदालतें अपने न्यायिक विवेक से ही लेंगी.
कई हाइकोर्ट में पहले से मौजूद है ऐसी व्यवस्था
मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड हाइकोर्ट ने यह भी बताया कि कलकता हाइकोर्ट के अलावा केरल, कर्नाटक और दिल्ली हाइकोर्ट ने भी बच्चों की कस्टडी तथा माता-पिता से मिलने के अधिकार से संबंधित गाइडलाइन को न्यायालयों तक पहुंचाने के लिए न्यायिक निर्देश जारी किये हैं.
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झारखंड हाइकोर्ट की खंडपीठ ने संबंधित निर्देश जारी करने के साथ स्वत: संज्ञान से शुरू की गयी जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया. अब रूल्स कमेटी और उसके बाद फुलकोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने तक कलकता हाइकोर्ट की चाइल्ड एक्सेस एंड कस्टडी गाइडलाइन पैरेंटिंग प्लान-2025 राज्य में ऐसे मामलों के लिए अंतरिम संदर्भ के रूप में इस्तेमाल की जायेगी. इस व्यवस्था का मुख्य केंद्र बच्चों का हित रहेगा. तलाक, वैवाहिक विवाद या पारिवारिक मतभेद के बीच बच्चों की कस्टडी और माता-पिता से मुलाकात जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अदालतों को उपलब्ध मार्गदर्शन से निर्णय प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
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