अनगड़ा से जितेन्द्र कुमार की रिपोर्ट
Ranchi News: जब अपने खून के रिश्ते मुंह मोड़ लेते हैं और सरकारी व्यवस्था बेरुखी दिखाती है, तब समाज और इंसानियत ही आखिरी उम्मीद बनकर सामने आती है. गोंदलीपोखर में रहने वाले 50 वर्षीय जयप्रकाश सिंह मुंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही हृदयविदारक है. अपनों के द्वारा ठुकराए जाने और एक सड़क हादसे के बाद जब सरकारी अस्पताल ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया, तब गांव के समाजसेवियों ने आगे आकर इंसानियत की एक नई मिसाल पेश की.
बचपन में छिन गया था माता-पिता का साया
जयप्रकाश की जिंदगी बचपन से ही दुखों के साये में गुजरी है. वे मूल रूप से सोनाहातू प्रखंड के किसी गांव के निवासी हैं. बचपन में ही उनके सिर से माता-पिता का साया उठ गया था. जिन रिश्तेदारों पर उनकी हिफाजत की जिम्मेदारी थी, उन्होंने भी बेरहमी दिखाते हुए इस मासूम को रांची की सड़कों पर अनाथ छोड़ दिया. दर-दर भटकते हुए जयप्रकाश किसी तरह गोंदलीपोखर पहुंचे. यहीं रहकर छोटे-मोटे काम करते हुए वे पले-बढ़े. उन्होंने विवाह नहीं किया और गोंदलीपोखर के ग्रामीणों को ही अपना सच्चा परिवार मान लिया.
अस्पताल ने लौटाया
तकदीर ने करीब एक पखवाड़े (15 दिन) पहले जयप्रकाश को फिर एक कड़ा झटका दिया. एक सड़क दुर्घटना में वे गंभीर रूप से घायल हो गये. उनका एक पैर बुरी तरह टूट गया था. स्थानीय लोगों ने हमदर्दी दिखाते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची के रिम्स (RIMS) भेज दिया. डॉक्टरों ने बताया कि पैर का ऑपरेशन करना बेहद जरूरी है. लेकिन यहां व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना सामने आई, अस्पताल में जयप्रकाश के देखभाल के लिए कोई सगा-संबंधी मौजूद नहीं था, जिसके चलते उनका इलाज रोक दिया गया. दर्द से कराहते, लाचार और बेबस जयप्रकाश को टूटे पैर के साथ बिना इलाज के ही वापस गोंदलीपोखर लौटना पड़ा.
दर्द बांटा समाजसेवियों ने, उठाया इलाज का बीड़ा
कहा जाता है कि जिसका कोई नहीं होता, उसका समाज होता है. गुरुवार को जब जयप्रकाश की इस दयनीय और लाचार स्थिति की जानकारी समाजसेवी रामपोदो महतो और नीलकंठ चौधरी को मिली, तो वे खुद को रोक नहीं पाए. उन्होंने तुरंत जयप्रकाश को एक निजी अस्पताल ले गए, पैर का एक्स-रे कराया गया, रामपोदो महतो ने बताया कि जयप्रकाश का पैर टूट गया है, जिसका एक मात्र इलाज ऑपरेशन है, लेकिन बंगाल में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक है जो टुटे हुए हड्डियों का इलाज बगैर ऑपरेशन के करते हैं, जयप्रकाश को शनिवार या रविवार को पहले वहीं ले जाया जाएगा.
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