5000 मुकदमों में झारखंड सरकार के फंसे हैं 3500 करोड़ रुपये, वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव लाये ‘कर समाधान योजना’

वित्त मंत्रालय व्यापारियों की सहूलियत के लिए ‘कर समाधान योजना’ लाया है, जिसकी मदद से सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा और कोर्ट-कचहरी में टैक्स से संबंधित मुकदमों की संख्या में भी कमी आयेगी. विभिन्न कोर्ट में इस वक्त करीब 5,000 केस पेंडिंग हैं और उसकी वजह से झारखंड सरकार का 3,500 करोड़ रुपये फंसा हुआ है.

झारखंड सरकार के टैक्स कलेक्शन में बंपर इजाफा हुआ है. लक्ष्य से पहले ही सरकार ने 500 करोड़ रुपये अधिक राजस्व की वसूली कर ली है. इसके साथ ही राज्य का वित्त मंत्रालय व्यापारियों की सहूलियत के लिए ‘कर समाधान योजना’ लाया है, जिसकी मदद से सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा और कोर्ट-कचहरी में टैक्स से संबंधित मुकदमों की संख्या में भी कमी आयेगी. विभिन्न कोर्ट में इस वक्त करीब 5,000 केस पेंडिंग हैं और उसकी वजह से झारखंड सरकार का 3,500 करोड़ रुपये फंसा हुआ है. इस योजना से सरकार को 500 करोड़ रुपये टैक्स मिलने की उम्मीद है.

वित्त मंत्री ने किया ‘कर समाधान योजना’ का शुभारंभ

वाणिज्यकर विभाग ने व्यापारियों के बकाया कर भुगतान के समाधान के लिए ‘समाधान योजना’ की शुरुआत की गयी है. झारखंड के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने बुधवार को इसका शुभारंभ किया. मंत्री वित्त सह वाणिज्य कर मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि करदाता समय पर टैक्स का भुगतान कर देश एवं राज्य के विकास में भागीदार बनें. उन्होंने कहा कि टैक्स से मिले पैसे का उपयोग सरकार देश एवं राज्य के विकास और लोक कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करती है.

व्यापारी कर समाधान योजना का लाभ लें

होटल बीएनआर चाणक्य में कर समाधान योजना का शुभारंभ करते हुए डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि राज्य में व्यावसायिक क्षेत्र के जितने भी बड़े टैक्स पेयर हैं, जिनका टैक्स बकाया है और जिनके मामले कोर्ट में लंबित हैं, उनके ‘वन टाइम सेटेलमेंट’ के लिए ही कर समाधान योजना लायी गयी है. करदाता इस योजना से लाभ लें और इस योजना को सफल बनायें.

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बिजनेसमैन को मिलेगा वन टाइम सेटलमेंट का मौका

डॉ रामेश्वर उरांव ने बताया कि करीब 5,000 केस कोर्ट में पेंडिंग हैं, जो टैक्स नहीं देने वाले व्यापारियों से संबंधित हैं. इससे राज्य सरकार को टैक्स का नुकसान हो रहा है और टैक्सपेयर भी कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं. इसमें भी पैसे खर्च हो जाते हैं. यह न तो राज्य सरकार के हित में है, न ही उन लोगों के लिए जिन्होंने टैक्स का भुगतान नहीं किया है. इसलिए सरकार कर समाधान योजना लायी है, ताकि व्यापारियों को सहूलियत हो.

मामला सुलझा लें, टैक्स का भुगतान कर दें : डॉ रामेश्वर उरांव

उन्होंने कहा कि व्यावसायिक क्षेत्र के करदाता इस योजना का लाभ लें और वन टाइम सेटलमेंट (One Time Settlement) से मामला सुलझा लें. कर का भुगतान कर दें. वाणिज्य कर मंत्री ने कहा कि राज्य गरीब है, पिछड़ा है. हमें राज्य को विकास के पथ पर ले जाने के लिए पैसे की जरूरत है. इसलिए कर का सही समय पर भुगतान करें. उन्होंने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि बकायादारों से सहूलियत के साथ टैक्स वसूलें. कोर्ट में लंबित मामलों को सुलझायें. कर समाधान योजना के तहत उनका भुगतान करायें.

रिसोर्स मोबिलाइजेशन पर ध्यान देने की जरूरत

उन्होंने कहा कि हमें राज्य में रिसोर्स मोबिलाइजेशन पर ध्यान देने की जरूरत है. राजस्व उगाही विभाग की समीक्षा करने की जरूरत है, ताकि राज्य में राजस्व को और अधिक बढ़ाया जा सके. उन्होंने कहा कि ओड़िशा और झारखंड में खनन क्षेत्र करीब-करीब बराबर ही है, लेकिन वहां का खनन राजस्व लगभग 50 हजार करोड़ रुपये है और हमारे यहां मात्र 9 हजार करोड़ रुपये.

इस वर्ष लक्ष्य से अधिक राजस्व वसूली

डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि इस वर्ष हमने लक्ष्य से अधिक राजस्व प्राप्त किया है. इसके लिए उन्होंने विभाग के पदाधिकारियों को बधाई दी. साथ ही उन करदाताओं का भी आभार जताया, जिन्होंने समय पर टैक्स का भुगतान करके इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग दिया.

योजना से टैक्स भुगतान में होगी सहूलियत : आराधना पटनायक

वाणिज्य कर विभाग की प्रधान सचिव आराधना पटनायक ने कहा कि झारखंड कराधान अधिनियमों की बकाया राशि का समाधान अधिनियम 2022 (कर समाधान योजना) का उद्देश्य बकाया करदाताओं, जिनके मामले कोर्ट में लंबित हैं, उनका ‘वन टाइम सेटेलमेंट करा कर’ टैक्स का भुगतान करने की सहूलियत देना है. उन्होंने कहा कि कोर्ट में लंबित मामलों के कारण करीब 3,500 करोड़ रुपये बकाया है. लंबित मामलों के कारण सरकार को तत्काल कोई राशि प्राप्त नहीं हो रही है.

कर समाधान के लिए कई यूनिट का हुआ गठन

आराधना पटनायक ने कहा कि कर समाधान योजना से लंबित एवं विवादित मामलों के समाधान से राज्य सरकार को करीब 500 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति की संभावना है. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा आईआरएयू (इंटेलीजेंस एंड रेवेन्यू एनालाइज यूनिट) का गठन किया गया है, जिसका कार्य आंकड़ों का विश्लेषण करना, साथ ही कर देय व्यक्तियों द्वारा दाखिल विवरणियों की पारस्परिक जांच, सेक्टरवार ई-वे बिल निर्गमन की जांच करना है. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा एसटीयू (स्पेशल टैक्स यूनिट) का भी गठन किया गया है, जो राज्य के 5 अंचलों मे काम करेगी. इनका कार्य राज्य में बड़े बकायादारों को प्रॉपर गाइड करना है. कर वसूली में सहयोग प्रदान करना है.

2022-23 में 500 करोड़ रुपये अधिक राजस्व की वूसली

वाणिज्य कर आयुक्त संतोष वत्सल ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में 18 हजार करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 18,500 करोड़ रुपये के राजस्व की वूसली विभाग ने की है. विभाग के पदाधिकारियों की मेहनत का ही परिणाम है कि हमने लक्ष्य से अधिक वसूली की है. इस अवसर पर अपर वाणिज्य कर आयुक्त एवं विभाग के पदाधिकारीगण सहित व्यावसायिक जगत के कई जाने-माने लोग मौजूद थे.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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