रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड के गिरिडीह के डुमरी थाना कांड से जुड़े दो एनआइए मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के गवाहों की जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन बचाव पक्ष के गवाहों की जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है. ट्रायल में हो रही देरी को देखते हुए कोर्ट ने आरोपियों को जमानत देना उचित माना और संबंधित ट्रायल कोर्ट को तीन माह के भीतर प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया.
लंबी हिरासत को आधार मानते हुए मनोज कुमार चौधरी को मिली राहत
याचिकाकर्ता मनोज कुमार चौधरी की ओर से अधिवक्ता आकृति प्रिया ने अदालत को बताया कि स्पेशल केस-5/2018 और 6/2018 सहित संबंधित आरसी केस में वे करीब छह वर्षों से लगातार जेल में हैं. उन्होंने यह भी कहा कि एनआईए की जांच में टेरर फंडिंग का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है. इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत देने का निर्णय लिया.
झरीलाल महतो भी सात वर्ष नौ माह से थे जेल में बंद, ट्रायल में सहयोग का निर्देश
दूसरे याचिकाकर्ता झरीलाल महतो की ओर से अदालत को बताया गया कि वे करीब सात वर्ष नौ माह से जेल में बंद हैं और उनका नाम स्पेशल केस (नंबर 5/2018 और संबंधित आरसी केस) में दर्ज है. यह मामला गिरिडीह के डुमरी थाना कांड से जुड़ा है, जिसमें देशद्रोह, आपराधिक साजिश, गैरकानूनी गतिविधियों तथा हथियार और विस्फोटक अधिनियम की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए दोनों आरोपियों को ट्रायल में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया है.
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