ओरमांझी सीलबंद शराब फैक्ट्री चोरी मामला: बिहार के पूर्व MLC और RJD नेता सुबोध राय पर FIR

रांची की एक सीलबंद शराब फैक्ट्री में चोरी के आरोप में बिहार के पूर्व MLC सुबोध राय के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. फैक्ट्री परिसर में ताले टूटे मिले, CCTV DVR गायब था, जिससे गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.


Ranchi News: रांची के ओरमांझी स्थित मेसर्स तरंगिनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड की सीलबंद शराब फैक्ट्री में चोरी के मामले में बिहार के पूर्व एमएलसी और राजद नेता सुबोध राय पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. सीलबंद परिसर की दोबारा जांच के दौरान ताले टूटे मिलने, CCTV का DVR गायब होने और परिसर में रखी सामग्री की स्थिति संदिग्ध पाये जाने के बाद उत्पाद विभाग की ओर से पुलिस को आवेदन दिया गया था. अब इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

पहले अवैध शराब मिलने पर हुई थी कार्रवाई

मामला उसी तरंगिनी लिकर्स परिसर से जुड़ा है, जहां एक जुलाई 2026 को औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं पायी गयी थीं और अवैध शराब बरामद होने के बाद ओरमांझी थाना में कांड दर्ज किया गया था. इसके बाद संबंधित परिसर को उत्पाद विभाग की निगरानी में सीलबंद किया गया था. मामले में सुबोध राय समेत अन्य लोगों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है.

जफर हसनात की अध्यक्षता में टीम

दो जांच के लिए प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी मोहम्मद जफर हसनात की अध्यक्षता में टीम ने परिसर का निरीक्षण किया. टीम में मनोज कुमार, पु0अ0नि0-सह-थाना प्रभारी, ओरमांझी थाना, रांची तथा अनुसंधानकर्ता पु0अ0नि0 नितेश कुमार शामिल थे. इसके अलावा उत्पाद विभाग से निरीक्षक उत्पाद इमन कुजुर, अवर निरीक्षक उत्पाद प्रकाश मिश्र और अवर निरीक्षक उत्पाद नेहाशीष कुमार सेन भी जांच टीम का हिस्सा थे.

कंपनी और रेडिको के प्रतिनिधि भी मौजूद

जांच के दौरान मेसर्स तरंगिनी लिकर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुबोध कुमार भी मौजूद थे. वहीं मेसर्स रेडिको खेतान लिमिटेड की ओर से जितेंद्र कुमार बरियार और आंशु मलिक अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में जांच में शामिल हुए. टीम की मौजूदगी में परिसर के मुख्य द्वार का सील खोलकर अंदर की स्थिति का निरीक्षण किया गया.

दोबारा जांच में खुला मामला

उपायुक्त, रांची के सात जुलाई के आदेश के आलोक में परिसर की दोबारा जांच के लिए दंडाधिकारी की अध्यक्षता में टीम गठित की गयी थी. टीम में दंडाधिकारी मोहम्मद जफर हसनात के अलावा ओरमांझी थाना प्रभारी मनोज कुमार, अनुसंधानकर्ता नितेश कुमार तथा उत्पाद विभाग के अधिकारी इमन कुजुर, प्रकाश मिश्र और नेहाशीष कुमार सेन शामिल थे. कंपनी की ओर से निदेशक सुबोध कुमार तथा रेडिको खेतान की ओर से जितेंद्र कुमार बरियार और आंशु मलिक भी जांच के दौरान मौजूद थे.

टूटे मिले कई ताले

जांच के दौरान परिसर के मुख्य द्वार का सील खोलने के बाद ब्लेंडिंग हॉल के शटर का ताला टूटा मिला. इसके अलावा बॉटलिंग हॉल और कार्यालय के बीच के दरवाजे का सीलबंद ताला भी टूटा हुआ पाया गया. कार्यालय का लॉक भी क्षतिग्रस्त था. जांच टीम को परिसर की सुरक्षा व्यवस्था में छेड़छाड़ के स्पष्ट संकेत मिले.

CCTV DVR भी मिला गायब

जांच के दौरान कार्यालय में लगा CCTV सिस्टम का DVR भी गायब पाया गया. सीलबंद परिसर में CCTV रिकॉर्डिंग से संबंधित उपकरण का नहीं मिलना मामले को और गंभीर बनाता है. इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि सीलबंदी के बाद परिसर में किसने प्रवेश किया और वहां रखी सामग्री के साथ क्या गतिविधियां हुईं. इन बिंदुओं की जांच अब पुलिस करेगी.

स्टॉक और सामग्री पर भी सवाल

जांच टीम ने परिसर के विभिन्न कुंडों और वहां रखी सामग्री का भौतिक सत्यापन किया. आवेदन के अनुसार कुछ स्थानों पर स्टॉक शून्य पाया गया, जबकि EAL और तैयार बोतलों की कुछ पेटियां परिसर में बिखरी हुई थीं. इन परिस्थितियों के आधार पर उत्पाद विभाग ने सीलबंद परिसर में चोरी की आशंका जताते हुए पुलिस से प्राथमिकी दर्ज कर गहन जांच का अनुरोध किया था.

पुलिस जांच में सामने आयेगा सच

अब FIR दर्ज होने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटेगी कि सीलबंद परिसर में प्रवेश किसने किया, ताले कब और कैसे टूटे तथा CCTV DVR समेत अन्य सामान कहां गया. साथ ही परिसर से किसी सामग्री को हटाये जाने की स्थिति में उसकी मात्रा और जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में होगी. आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी.

पहले भी सुबोध राय पर कार्रवाई

तरंगिनी लिकर्स से जुड़े अवैध शराब मामले में सुबोध राय समेत अन्य आरोपियों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है. जुलाई में छापेमारी के दौरान पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त कार्रवाई में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, उस कार्रवाई में बड़ी मात्रा में कथित अवैध शराब बरामद की गयी थी.

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बढ़ सकती है कानूनी मुश्किल

सीलबंद शराब फैक्ट्री में कथित चोरी के मामले में FIR दर्ज होने के बाद सुबोध राय की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. हालांकि, प्राथमिकी में लगाये गये आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी. पुलिस अब सीलबंदी की प्रक्रिया, परिसर की सुरक्षा, ताले टूटने की परिस्थितियों, गायब CCTV DVR और स्टॉक से जुड़ी जानकारी को जोड़कर पूरे मामले की जांच करेगी.

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By Pranav singh

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