रांची (संवाददाता). मुंडारी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर झारखंड आदिवासी विकास समिति की ओर से रविवार को पदयात्रा का आयोजन हुआ. समिति के महानगर अध्यक्ष अमित मुंडा के नेतृत्व में पारंपरिक ढोल, भेर, नगाड़ों के साथ पदयात्रा बहूबाजार चौक से चुटिया मेन रोड होते हुए मुंडा गढ़ा तक गयी.
सरकार की उदासीनता से लुप्त हो रही मुंडारी भाषा
इस अवसर पर पद्मश्री मुकुंद नायक ने पदयात्रा का स्वागत किया. मौके पर समिति के केंद्रीय अध्यक्ष प्रभाकर नाग ने कहा कि रांची एवं इसके आसपास और झारखंड में लगभग सभी गांव-टोला, पहाड़-नदी का नाम मुंडारी भाषा में ही है, जो धीरे-धीरे अपभ्रंश होकर बदलते जा रहे हैं. केंद्र सरकार की उदासीनता की वजह से मुंडारी भाषा लुप्त होती जा रही है. भाषा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. उन्होंने कहा कि अविलंब मुंडारी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाये. अमित मुंडा ने कहा कि मुंडारी भाषा भारत की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है. इसके संरक्षण संवर्धन के लिए जरूरी है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में इसे शामिल किया जाये.
मदरा मुंडा के नाम पर हो रांची रेलवे स्टेशन
झारखंड आदिवासी विकास समिति ने यह भी मांग की है कि रांची रेलवे स्टेशन का नामकरण मुंडाओं के अंतिम महाराजा मदरा मुंडा के नाम पर हो, साथ ही एयरपोर्ट सहित सभी सरकारी कार्यालय का नाम हिंदी इंग्लिश के साथ मुंडारी लिपि में भी हो. इसके अलावा चुटिया नागपुर का इतिहास सामने लाने के लिए पुरातात्विक सर्वेक्षण करने की भी जरूरत है. आज के कार्यक्रम में बलेश नायक, मनोज मुंडा, विक्की मुंडा, सौरभ मुंडा, बेदाग भेंगरा, सिलास टोपनो, दीपक सुरीन, गोविंद नायक सहित अन्य लोग थे.
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