रांची. शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने को लेकर 14 जुलाई को नगर निगम सभागार में बैठक हुई थी. इसमें निगम के अपर प्रशासक संजय कुमार, उप प्रशासक रवींद्र कुमार, स्वच्छता कॉरपोरेशन के पदाधिकारी और 53 वार्ड के सुपरवाइजर मौजूद थे. मौके पर अपर प्रशासक और उप प्रशासक ने चेतावनी दी थी कि कंपनी प्रतिदिन घरों से कूड़े का उठाव सुनिश्चित करे और जरूरत के अनुसार मैनपावर मैदान में उतारे. आज चेतावनी दिये 50 दिन हो गये हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था सुधरने के बजाय बिगड़ती जा रही है. बैठक के समय कंपनी के कूड़ा वाहन सप्ताह में एक दिन आते थे, अब दो-दो सप्ताह बाद आ रहे हैं.
बारिश में भीग कर सड़ रहा कचरा
नियमित कचरा उठाव नहीं होने से लोग घरों का कचरा खुले स्थानों पर फेंक रहे हैं. वहां से भी उठाव नहीं हो रहा. लगातार बारिश और 174 ट्रैक्टरों की हड़ताल के कारण मुख्य सड़कों से तो कचरा उठ रहा है, लेकिन गली-मोहल्लों को उसी हाल में छोड़ दिया गया है. बारिश से भीग कर कचरा सड़ रहा है. दुर्गंध से लोग नाक-मुंह बंद कर चलने को मजबूर हैं.
डस्टबिन में आखिर कितने दिन तक रखें
दो-दो सप्ताह तक कूड़ा वाहन नहीं आने से लोग मजबूर हैं कि डस्टबिन का कचरा कितने दिन घर में रखें. दो-तीन दिन बाद दुर्गंध से घर में रहना मुश्किल हो जाता है, इसलिए लोग इसे बाहर खुले स्थानों और नालों में फेंक रहे हैं.
80 से लेकर पांच हजार रुपये तक वसूली करता है निगम
कचरा उठे या न उठे, नगर निगम हर घर से कचरा उपभोक्ता शुल्क वसूलता है. यह 80 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक होता है. कई लोग इस शुल्क को लेकर जागरूक नहीं हैं, क्योंकि निगम एक बार में तीन से पांच साल का बिल जारी करता है.
इन क्षेत्रों की हालत सबसे खराब
कोकर अयोध्यापुरी, चेशायर होम रोड, हनुमान नगर, हरमू हाउसिंग कॉलोनी, विद्यानगर, चुटिया, मकचुंद टोली, केतारी बागान, अलबर्ट कंपाउंड, एदलहातू, तिरिल रोड कोकर, पीस रोड, मधुकम, किशोरगंज, आनंद नगर, विद्यानगर, गंगानगर, यमुना नगर, न्यू अलकापुरी डोरंडा, हिनू और बिरसा चौक क्षेत्र में कूड़ा उठाव का हाल बेहाल है.
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