प्रति एकड़ एक नौकरी व पुनर्वास के लिए 25 डिसमील जमीन दे सीसीएल

सीसीएल के अशोक परियोजना विस्तारीकरण को लेकर पर्यावरणीय लोक सुनवाई बरवाटोला में शुक्रवार को एडिशनल कलेक्टर अरविंद कुमार की अध्यक्षता में हुई.

प्रतिनिधि, पिपरवार.

सीसीएल के अशोक परियोजना विस्तारीकरण को लेकर पर्यावरणीय लोक सुनवाई बरवाटोला में शुक्रवार को एडिशनल कलेक्टर अरविंद कुमार की अध्यक्षता में हुई. अशोक पीओ जितेंद्र कुमार सिंह ने प्रस्तावित अशोक वेस्ट परियोजना खनन कार्य से पर्यावरण पर पड़नेवाले प्रभाव व उसके समाधान की विस्तृत कार्ययोजना ग्रामीणों के समक्ष रखते हुए उनसे पर्यावरणीय स्वीकृति देने का आग्रह किया. सुनवाई में परियोजना प्रभावित 14 गांवों के लोगों ने सीसीएल प्रबंधन के आश्वासन पर संदेह जताते हुए जिला प्रशासन के समक्ष अपनी शर्तें रखी. ग्रामीणों ने पिपरवार क्षेत्र की पिपरवार व अशोक परियोजना का उदाहरण देते हुए सीसीएल अधिकारियों के आश्वासन पर संदेह व्यक्त किया. प्रभावित विस्थापितों ने एकमुश्त नौकरियां देने की मांग की. इसके अलावा प्रति एक एकड़ पर नौकरी देने, पुनर्वास के लिए 25 डिमी जमीन देने व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, रोड सेल के माध्यम से लोगों को रोजगार देने, खनन के बाद जमीन समतल कर रैयतों के नाम खतियान देने, जंगल के मूल पेड़ों को लगाने, प्रदूषण पर ईमानदारी से नियंत्रित करने, रैयतों को पहचान पत्र उपलब्ध कराने, सतपहाड़ी को संरक्षित कर पर्यटनस्थल के रूप में विकसित करने आदि मांग की गयी. जीएम संजीव कुमार ने ग्रामीणों के संदेहों को दूर करते हुए नयी परियोजना में 250 रैयतों के अलावा वन पट्टा निर्गत होने पर लगभग 700 लोगों को नौकरी मिलने की जानकारी दी. बताया कि रोड सेल के माध्यम से बेराेजगार युवक अपनी आजीविका चला सकेंगे. श्री कुमार ने कार्ययोजना प्रस्तुत कर ग्रामीणों के संदेहों को दूर किया. अंत में एडिशनल कलेक्टर अरविंद कुमार ने लोक सुनवाई की सारी रिकॉर्डिंग सरकार को भेजने की बात कही. उन्होंने भी प्रबंधन को ग्रामीणों की समस्याओं को दूर करने का निर्देश दिया. कहा कि जो विकास कार्य सीसीएल से छुट जायेगा, उसे जिला प्रशासन डीएमएफटी फंड से करायेगा.

20 मिलियन टन होगी अशोक वेस्ट परियोजना की क्षमता :

अशोक वेस्ट परियोजना की क्षमता 20 मिलियन टन होगी. कुल 1278.87 हेक्टेयर भूमि पर खनन कार्य किया जायेगा. इसमें 738.311 हेक्टेयर वन भूमि व 307 हेक्टेयर कृषि भूमि का उपयोग किया जायेगा. इस परियोजना से जी-11 ग्रेड का कोयले का उत्पादन होगा. परियोजना की आयु 19 वर्ष होगी. चौथे वर्ष से 20 मिलियन टन उत्पादन शुरू हो जायेगा. परियोजना से सरैया, लुकईया, झोलनडीहा, हेंजदा, तोरहद, कुटकी, कोयलरा, ठेठांगी, चिरलौंगा, बाली, डेम्बुआ, सिदालु, विजैन व कुटकी खुर्द उर्फ ठेना गांव प्रभावित होंगे.

ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन :

लोक सुनवाई के दौरान प्रभावित गांवों के लोग अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष हाथों में तख्तियां लिये प्रदर्शन किया. कहा कि हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनकी मांगें पूरी होने चाहिए. तभी परियोजना का काम शुरू करने दिया जायेगा. इस संबंध में उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा. उनकी मांगें भी वही थी, जो सुनवाई के दौरान बतायी गयी.

लोक सुनवाई में बोले ग्रामीण :

ग्रामीणों में रचित गंझू, महावीर गंझू, रामचंद्र लोहार, मिश्रा पासवान, रामाशीष उरांव, आदित्य कुमार केशरी, इस्लाम अंसारी, विजय चौबे, रंथू उरांव, राम कुमार उरांव, विजय उरांव, सुलेंदर कुमार, करण कुमार महतो, सुखी गंझू, अनिता देवी, रीना कुमारी ने अपना पक्ष रखा. संचालन कार्मिक अधिकारी शिशिर गर्ग ने किया. मौके पर प्रदूषण बोर्ड हजारीबाग के आरओ जेपी सिंह, सीओ टंडवा विजय कुमार दास, बीडीओ देवलाल उरांव, जेइ जेएसपीसीब चंदन कुमार, जीएम पर्यावरण राजकुमार, क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी संजय कुमार, मैनेजर दिलीप कुमार आनंद सहित श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

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By JITENDRA RANA

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