ranchi news : गीत-संगीत, साहित्य और संस्कृति से रांची में सजे बांग्ला मेला का हुआ समापन
बंगाली युवा मंच चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय बांग्ला सांस्कृतिक मेले के अंतिम दिन भीड़ उमड़ पड़ी.
रांची. तुमी जाके भालो बासो स्नानेर घरे बासपे भाषो…और ऐशो ए बोइशाख, ऐशो ऐशो जैसे बांग्ला गीतों की मधुर ध्वनि से रविवार को बांग्ला मेला परिसर गूंज उठा. बंगाली युवा मंच चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय बांग्ला सांस्कृतिक मेले के अंतिम दिन भीड़ उमड़ पड़ी. मेले के आकर्षण का केंद्र रही जी बांग्ला सारेगामापा की प्रथम रनर अप मयूरी दरानी, जिनके गीतों पर लोग झूमते नजर आये. उनके साथ अन्य गायक-गायिकाओं ने भी शानदार प्रस्तुतियां दीं.
बांग्ला परिधान प्रतियोगिता में दिखी प्रतिभा
इस दौरान बांग्ला परिधान प्रतियोगिता भी हुई. साथ ही, साहित्य सभा में नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती की 100वीं जयंती पर वक्ताओं ने विचार रखे. अर्चा साहित्य कला अकादमी के बैनर तले रवींद्र संगीत की प्रस्तुति भी दी गयी. काव्य पाठ में डॉ देवेश ठाकुर सहित कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं. मेले का मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया रोगियों के लिए सहयोग राशि जुटाना था. साथ ही, लोगों को मनोरंजन और बांग्ला संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी मिला.मेला परिसर में कुल 20 स्टॉल लगाये गये
स्टॉल पर बांग्ला किताबें, हस्तशिल्प, पारंपरिक परिधान, साड़ियां, आभूषण, पौधे, बैग, भजन संगीत और पेंटिंग आदि से जुड़े स्टॉल शामिल थे. मेले में चित्रांकन, साहित्य सभा, कविता पाठ, नृत्य, संगीत और नाटक जैसे कार्यक्रम हुए. इसमें स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ कोलकाता के कलाकारों ने भी भाग लिया. लोगों ने पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने के साथ जमकर खरीदारी भी की.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
