झारखंड के 21.5 फीसदी स्कूलों में शौचालय उपयोग के लायक नहीं, शेष में लगा है ताला: रिपोर्ट

झारखंड में 5.5 फीसदी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए अलग से कोई शौचालय नहीं है. जबकि 3.7 फीसदी स्कूलों में शौचालय में ताला लगा रहता है. 18 फीसदी शौचालय उपयोग के लायक नहीं है

झारखंड में अब तक शत-प्रतिशत स्कूलों में पेयजल व शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं हो पायी है. असर की वर्ष 2022 की रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में अब तक भी पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय, बिजली जैसी सुविधाएं नहीं हैं. रिपोर्ट के अनुसार स्कूलों में शौचालय तो बना दिया गया है, पर रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस कारण शौचालय होने के बाद उपयोग के लायक नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार 75.7 फीसदी स्कूलों में शौचालय उपयोग के लायक है, जबकि 21.5 फीसदी स्कूलों में शौचालय उपयोग के लायक नहीं है. शेष स्कूलों में शौचालय नहीं है.

झारखंड में 5.5 फीसदी विद्यालयों में बालिकाओं के लिए अलग से कोई शौचालय नहीं है. जबकि 3.7 फीसदी स्कूलों में शौचालय में ताला लगा रहता है. 18 फीसदी शौचालय उपयोग के लायक नहीं है. राज्य के सरकारी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनाने के लिए रसोई घर का निर्माण भी नहीं हो सका है. विगत वर्षों की तुलना में स्कूलों में यह सुविधा बढ़ी है, पर इसके बाद भी राज्य के 15 फीसदी स्कूलों में मध्याह्न भोजन के लिए रसोई घर नहीं है.

स्कूलों में संसाधन की स्थिति

राज्य के 50.7 फीसदी प्राथमिक विद्यालय व 2.7 फीसदी मध्य विद्यालय में बच्चों का नामांकन 60 या उससे कम है.

82.1 फीसदी स्कूलों में पेयजल की सुविधा है पर 11.3 फीसदी स्कूलाें में पेयजल नहीं

27.1% विद्यालयों में बच्चों के द्वारा पुस्तकालय के पुस्तक का उपयोग नहीं हो रहा है.

91.5 फीसदी स्कूलों में विद्यार्थियों के उपयोग के लिए कंप्यूटर नहीं

कक्षा पांच तक में 70 फीसदी बच्चे 95.3 फीसदी शिक्षक रहते हैं उपस्थित

मध्य विद्यालय में कक्षा बच्चों की औसत उपस्थिति 62 फीसदी तो शिक्षकों की उपस्थिति 90.8 फीसदी है.

92.1 फीसदी स्कूलों में है बिजली कनेक्शन, पर सर्वेक्षण के दिन 73.1 फीसदी स्कूलों में बिजली नहीं थी.

राज्य में 89.6 फीसदी ऐसे विद्यालय हैं, जहां कक्षा एक व दो के बच्चे एक साथ बैठते हैं

21% प्राथमिक स्कूल कैंपस में है आंगनबाड़ी

रिपोर्ट के अनुसार 21.9 फीसदी प्राथमिक विद्यालय कैंपस एवं 14.4 फीसदी मध्य विद्यालय के कैंपस में आंगनबाड़ी है. वहीं 22.1 फीसदी प्राथमिक विद्यालय में व 16 फीसदी मध्य विद्यालय में अलग से पूर्व प्राथमिक कक्षा की पढ़ाई की व्यवस्था है.

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लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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