रांची: वर्ष 2010 में हुए 34वें नेशनल गेम के लिए जरूरत से कई गुना अधिक खेल सामग्री की खरीदारी हुई थी. ओलिंपिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने खेल सामग्री के सप्लायरों को लाभ पहुंचाने के लिए अधिक सामग्री की खरीदारी की थी. इसकी पुष्टि खेलगांव के मैनेजरों द्वारा निगरानी विभाग को दी गयी बची हुई खेल सामग्रियों की सूची से हुई है.
निगरानी के डीएसपी आनंद जोसेफ तिग्गा ने सोमवार को खेलगांव के मैनेजर कुंदन कुमार, जेपी दास, शंकर पग, उषा रानी व टीके पोद्दार से पूछताछ की. वहीं निगरानी के एडीजी नीरज सिन्हा ने बताया कि एक सप्ताह पहले ही खेलगांव के मैनेजरों से कहा गया था कि वह बची हुई खेल सामग्रियों की इनवेंटरी तैयार करें. सभी ने निगरानी विभाग को सूची सौंप दी है. सूची कोर्ट में पेश की जायेगी. इधर, सूत्रों के अनुसार सूची देखने से यह स्पष्ट होता है कि ओलिंपिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने जरूरत से अधिक खेल सामग्रियों की खरीद की थी. निगरानी के अधिकारी इस सूची के आधार पर अभियुक्तों से यह पूछताछ करेंगे कि खेल सामग्रियों की खरीद इतने बड़े पैमाने पर क्यों हुई. इससे पहले निगरानी विभाग ने 21 नवंबर को खेल गांव जाकर इस बात की जांच की थी कि कितने खेल सामग्री बचे हुए हैं, क्योंकि प्राथमिकी में यह आरोप है कि जरूरत से सात गुणा ज्यादा तक खेल सामग्री की खरीद की गयी थी.
इन सामग्री की हुई थी अधिक खरीदारी
जिमनास्टिक मैट (इंडियन और विदेशी), लाठी, भाला, टेनिस, बैडमिंटन, नेट सीलने की मशीन (41 पीस), दवाइयां, ताइक्वांडो मैट, म्यूजिक सिस्टम, प्लाज्मा टीवी, टेनिस बॉल, वीडियो स्क्रीन
प्राथमिकी में जो लगे हैं आरोप
550 रुपये प्रति दर्जन वाले टेनिस बॉल की खरीद 880 रुपये प्रति दर्जन की दर से हुई.
30 दर्जन टेनिस बॉल की जरूरत के मुकाबले 200 दर्जन टेनिस बॉल की खरीदारी हुई.
जरूरत से ज्यादा 10 करोड़ रुपये की वीडियो स्क्रीन खरीदी गयी.
जरूरत से अधिक 50 लाख रुपये की जैबलिन की खरीद की गयी.
