रांची : ओलिंपिक का टिकट हासिल करने वाली भावना जाट की सफलता के पीछे भी एक कहानी है. वो है इनके अथक परिश्रम की. राजस्थान के काबरा गांव की रहनेवाली भावना जाट पिछले 10 साल से पैदल चाल इवेंट में भाग ले रही हैं.2015 से 17 तक बेंगलुरू में अभ्यास किया. परिवार की हालत अच्छी नहीं थी, इसलिए बड़े भाई ने प्राइवेट नौकरी शुरू की, ताकि बहन को खेल में आगे बढ़ सके. भावना ने बताया कि 2016 में कोलकाता रेलवे में नौकरी लगी, लेकिन यहां का क्लाइमेट अभ्यास के लायक नहीं था.
दस साल की मेहनत से भावना को मिला ओलिंपिक का टिकट
रांची : ओलिंपिक का टिकट हासिल करने वाली भावना जाट की सफलता के पीछे भी एक कहानी है. वो है इनके अथक परिश्रम की. राजस्थान के काबरा गांव की रहनेवाली भावना जाट पिछले 10 साल से पैदल चाल इवेंट में भाग ले रही हैं.2015 से 17 तक बेंगलुरू में अभ्यास किया. परिवार की हालत अच्छी […]

वह हरियाणा चली गयी और प्राइवेट कोच गुरमुख के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया. उनकी सफलता के गवाह कोच भी थे. भावना ने कहा कि मेरी सफलता के पीछे मेरा परिवार है, जिसने हमेशा मेरा साथ दिया. जूनियर या सीनियर स्तर के किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भावना ने हिस्सा नहीं लिया है.
वह भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) के किसी शिविर का भी हिस्सा नहीं रही है. उन्होंने सीनियर स्तर पर 2016 में राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैम्पियनशिप से पदार्पण किया. हैदराबाद में आयोजित इस प्रतियोगिता में वह 1:52:38 सेकेंड के समय के साथ पांचवें स्थान पर
रही थी.