विभाग सामंजस्य बना समय सीमा में कार्य पूरा करें : कोर्ट

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को बायो मेडिकल वेस्ट के साइंटिफिक डिस्पोजल को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दाैरान बायो मेडिकल वेस्ट के निष्पादन के लिए लगाये जानेवाले प्लांटों को स्थापित करने में हो रहे […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |

रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को बायो मेडिकल वेस्ट के साइंटिफिक डिस्पोजल को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दाैरान बायो मेडिकल वेस्ट के निष्पादन के लिए लगाये जानेवाले प्लांटों को स्थापित करने में हो रहे विलंब पर नाराजगी जतायी. मौखिक रूप से कहा कि जनहित याचिका पर वर्ष 2012 से सुनवाई चल रही है.

कोर्ट का मानना है कि लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल रखना सरकार का कार्य है, कोर्ट का नहीं. सरकार के संबंधित विभागों को आपसी सामंजस्य बना कर टाइम फ्रेम के अंदर कार्य को पूरा करना चाहिए. सरकार इस जनहित याचिका के त्वरित निष्पादन पर अपना ध्यान केंद्रित करे, ताकि खतरनाक बायो मेडिकल कचरे का साइंटिफिक तरीके से निष्पादन हो सके. सुनवाई के दाैरान खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर शपथ पत्र पर असंतोष जताते हुए उसे वापस कर दिया.
खंडपीठ ने कहा कि शपथ पत्र पूर्व के आदेश के अनुरूप नहीं है. वहीं, शपथ पत्र दोबारा दायर करने का निर्देश दिया. साथ ही कहा कि कोर्ट के आदेशों को गंभीरता से लिया जाये.
22 नवंबर 2019 को कोर्ट ने मेडिकल कचरे के निष्पादन के लिए सरकार के संबंधित विभागों को आपस में विचार-विमर्श कर कार्य का शिड्यूल तय करने व संयुक्त जवाब दायर करने का निर्देश दिया था, लेकिन सरकार के शपथ पत्र में कार्य पूरा होने व लक्ष्य पूरा करने से संबंधित शिड्यूल नहीं दिया गया था.
खंडपीठ ने केंद्रीय वन, पर्यावरण व क्लाइमेट चेंज मंत्रालय के सचिव को प्रतिवादी बनाते हुए जवाब देने का निर्देश दिया. इससे पूर्व राज्य सरकार की अोर से बताया गया कि नयी सरकार के गठन के बाद से प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने में कठिनाइयां आ रही हैं.
स्टेट इंवाॅयरमेंटल असेस्मेंट इंपावर्ड अथॉरिटी (शिया) भी भंग है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी झारखंड ह्यूमन राइट्स कांफ्रेंस की अोर से जनहित याचिका दायर की गयी है. इसमें रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो में निकलनेवाले मेडिकल कचरे के उचित निष्पादन की मांग की गयी है.
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