रांची : 4.7 करोड़ की धोखाधड़ी के लिए फर्जी पते पर हुए थे बहाल

सुपौल व समस्तीपुर स्थित पते पर नहीं मिले दोनों कर्मी रांची : एसबीआइ और यूबीआइ के एटीएम में पैसा डालने के बजाय चार करोड़ सात लाख 53 हजार रुपये लेकर भागने के आरोपी गणेश कुमार ठाकुर और शिवम ठाकुर फर्जी पते पर बहाल हुए थे. इसका खुलासा तब हुआ, जब शनिवार को बिहार गयी रांची […]

सुपौल व समस्तीपुर स्थित पते पर नहीं मिले दोनों कर्मी
रांची : एसबीआइ और यूबीआइ के एटीएम में पैसा डालने के बजाय चार करोड़ सात लाख 53 हजार रुपये लेकर भागने के आरोपी गणेश कुमार ठाकुर और शिवम ठाकुर फर्जी पते पर बहाल हुए थे. इसका खुलासा तब हुआ, जब शनिवार को बिहार गयी रांची पुलिस ने स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों की ओर से कंपनी को दिये गये पते पर छापेमारी की. गणेश कुमार ठाकुर ने पिता का नाम दुखा ठाकुर और पता ग्राम चमेल्वा थाना थरबिटिया सुपौल बिहार और शिवम ने पिता का नाम छरपन निवासी मुसरीघरारी थाना समस्तीपुर बिहार बताया था.
लेकिन छापेमारी में दोनों इस पते पर नहीं मिले. इससे आशंका है कि दोनों योजनाबद्ध तरीके से घटना को अंजाम देने के लिए फर्जी पते पर बहाल हुए थे. शक यह भी है कि कहीं दोनों के नाम भी फर्जी तो नहीं हैं. हालांकि पुलिस को दोनों के दूसरे ठिकाने की भी जानकारी मिली है. लेकिन खबर लिखे जाने तक पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है. उल्लेखनीय है कि पुलिस को आरंभिक जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य मिले हैं, जिससे इस बात की आशंका है कि दोनों ने अन्य लोगों के सहयोग से धोखाधड़ी है. पहला तथ्य यह है कि दोनों विद्यानगर में एक साथ रहते थे. जबकि दोनों अलग-अलग जिले के रहनेवाले हैं. दोनों कंपनी में सूचीबद्ध मोबाइल से कंपनी के लोगों के अलावा किसी दूसरे से बात नहीं करते थे. दोनों ने अलग-अलग समय में नौकरी शुरू की थी. लेकिन घटना के बाद एक साथ मोबाइल बंद कर लापता हो गये. इधर एसएसपी ने मामले की जांच के लिए एसआइटी का गठन किया है.
दिसंबर के आखिर में होना है ऑडिट : इधर धोखाधड़ी मामले में रोज नयी जानकारी सामने आ रही है. जानकारी के मुताबिक एसबीआइ हर तीन महीने में ऑडिट करती है कि वेंडर अपने दावे के अनुसार एटीएम में पैसा जमा करते हैं या नहीं. क्योंकि एसबीआइ एटीएम से जुड़े वेंडर को हर दिन बड़ी धनराशि उपलब्ध कराती है और इसका हिसाब वेंडर से लिया जाता है. वहीं दूसरी ओर इस महीने के अंत में ऑडिट होना है.
इससे पहले ही दोनों ने घटना को अंजाम दे दिया. एटीएम कैश से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों की मानें तो दोनों कर्मी तकनीक और कंपनी की कार्यप्रणाली से पूरी तरह अवगत थे. इस मामले में एसआइएस अपने कर्मियों को ट्रांजेक्शन के लिए जो पैसा देती थी उससे कम एटीएम में डाला जाता था. जबकि शाम के वक्त एसआइएस को भेजे गए हिसाब में फुल दिखा दिया जाता था. इस तरह धीरे-धीरे राशि का गबन किया जाता रहा. इस बीच जब एसबीआइ के ग्राहकों के खातों के डिटेल और वेंडर कंपनी की जालसाजी का मिलान हुआ तब गड़बड़ियों का खुलासा हुआ.
एसआइएस ने 3़ 83 करोड़ रुपये लौटाये
रांची : एसआइएस के कर्मियों द्वारा की गयी धोखाधड़ी के एक सप्ताह बाद कंपनी ने एसबीआइ को 3.83 करोड़ रुपये लौटा दिये हैं. एसबीआइ से जुड़े ऑफसाइड बीएलए एटीएम का काम देखने वाले आउटसोर्स वेंडर ने ये पैसे वापस किये हैं.
शेष रुपये यूनियन बैंक के थे, उसे भी वापस करने की बात कही जा रही है. एसबीआइ के शीर्ष अधिकारी ने राशि देने की पुष्टि की है.साथ ही कहा कि इस घटना में एसबीआइ के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता नहीं है. बैंक के जिस 15 बीएलए एटीएम में गड़बड़ी हुई है, वह संबंधित वेंडर के जिम्मे है. इस एटीएम के वॉल्ट संचालन की जिम्मेदारी व पासवर्ड कोड भी वेंडर सीआइटी एजेंसी और कर्मियों के पास है.
17 एटीएम में डाले गये कैश : दूसरी ओर गड़बड़ी के एक सप्ताह बाद लगभग 17 एटीएम में कैश डाले गये. शनिवार को एसआइएस की गाड़ी कोकर शिव मंदिर स्थित एसबीआइ के आॅफसाइड एटीएम के सामने रुकी. कंपनी के सुपरवाइजर ने पहले एटीएम में तकनीकी जांच की. इसके बाद रुपये डाले गये.

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