पांचवें चरण में पड़े 71.17% वोट :
पांचवें चरण में संताल की 16 विधानसभा सीटों पर शुक्रवार को मतदान प्रक्रिया पूरी हो गयी. इसके साथ ही लोकतंत्र का महापर्व ‘झारखंड विधानसभा चुनाव-2019’ संपन्न हो गया. हालांकि, नक्सलियों ने राज्य के विभिन्न इलाकों में मतदान प्रक्रिया बाधित करने का प्रयास किया, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ. जिन लोगों ने नक्सली हमले में अपने परिजन को खोया या नक्सलवाद के प्रभाव से जिनके गांवों तक विकास की किरण नहीं पहुंची, उन्होंने भी लोकतंत्र की ताकत को समझा और वोट किया. सबसे सुखद यह रहा कि जिन नक्सलियों ने कभी मतदान का बहिष्कार किया था, उनके परिजन भी इस बार मतदाताओं की कतार में खड़े दिखे. झारखंड की जनता ने नक्सलवाद के खौफ को दरकिनार कर दिया.
ग्रामीण इलाकों में वोटरों में दिखा गजब का उत्साह, कड़ाके की ठंड में सुबह से ही बूथों पर लगी मतदाताओं की कतार
पिछली बार की तुलना में बोरियो, गोड्डा, महगामा और पोड़ैयाहाट में इजाफा, शेष 11 विधानसभा सीटों पर कम पड़े वोट
हेमंत सोरेन, डॉ लुइस मरांडी, रणधीर सिंह, नलिन सोरेन, अनंत ओझा, स्टीफन मरांडी व प्रदीप यादव थे मैदान में
देवघर : पांचवें और आखिरी चरण के चुनाव में संताल परगना की 16 विधानसभा सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हो गया. संताल की जनता ने 236 प्रत्याशियों की किस्मत को इवीएम में बंद कर दिया है. झारखंड के अन्य फेज के मुकाबले संताल परगना में बंपर वोटिंग हुई, 71.17 फीसदी वोटरों ने वोट किया. खासकर ग्रामीण इलाकों में वोटरों में गजब का उत्साह देखा गया. कड़ाके की ठंड के बावजूद अलसुबह से ही महिला और पुरुषों की लंबी कतार लगने लगी थी.
पांचवें चरण में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन, मंत्री रणधीर कुमार सिंह, मंत्री डॉ लोइस मरांडी, नलिन सोरेन, प्रो स्टीफन मरांडी, अनंत ओझा सहित 15 विधायकों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. सबसे अधिक नाला विधानसभा में 78.01 प्रतिशत वोट पड़े और सबसे कम 59.73 प्रतिशत वोट दुमका विधानसभा में पड़े हैं. पिछली बार की तुलना में इस बार सिर्फ बोरियो में 3.72 प्रतिशत वोट का इजाफा हुआ है.
10 सीटों पर 70% से ज्यादा वोटिंग
इस बार के चुनाव में 16 में 10 सीटों पर 70% से अधिक वोट पड़े हैं. जिन विधानसभा सीटों में 70% से अधिक वोट पड़े हैं, उसमें बोरियो, बरहेट, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, शिकारीपाड़ा, नाला, जामताड़ा, जरमुंडी और सारठ विधानसभा शामिल हैं. वहीं, पांच सीटों पर 60% से अधिक वोट पड़े हैं. सिर्फ दुमका विधानसभा में आंकड़ा 60% तक नहीं पहुंच पाया है. पाकुड़ में शहर के मतदाताओं में सुस्ती दिखी, जबकि ग्रामीणों में गजब का उत्साह दिखा.
नक्सली प्रभावित इलाकों में जमकर वोटिंग
संताल परगना की पांच सीटें, जो नक्सल प्रभावित हैं, उनमें लोगों ने बंदूक के भय को दरकिनार करते हुए जमकर वोटिंग की. ये इलाके हैं बोरियो, बरहेट, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर और शिकारीपाड़ा. उक्त नक्सल प्रभावित इलाकों में 70 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई. पांच जिले में सबसे अधिक वोट महेशपुर में पड़ा, यहां 74.81 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया. जबकि शिकारीपाड़ा में 73.25 फीसदी वोटिंग हुई. नक्सल प्रभावित बूथों पर सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे तक ही वोटिंग हुई. इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे. पारा मिलिट्री फोर्स बड़ी संख्या में लगाये गये थे.
कुछ जगहों पर झड़प को छोड़ शांतिपूर्ण रहा मतदान
संताल परगना में गोड्डा के पोड़ैयाहाट विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी गजाधर सिंह ने जेवीएम कार्यकर्ता पर मारपीट का आरोप लगाया है.
वहीं, जामताड़ा के नारायणपुर के कोरीडीह गांव में मतदान में बाधा पहुंचाने के आरोप में पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को पुलिस हिरासत में लिया है. इसके अलावा जामताड़ा में तैनात वैशाली के रहनेवाले हवलदार सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह का निधन हो गया. बोरियो विस के बूथ 146 में 65 वर्षीय वद्ध मतदाता सरयू साह की मौत मतदान कर केंद्र से बाहर निकलने के क्रम में हो गयी. हालांकि, मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है.
राजमहल के बूथ संख्या 243 पर फर्स्ट पोलिंग ऑफिसर बदले गये. वहीं, साहिबगंज में उधवा के सुतियारपाड़ा मालगोला में बूथ 261 व 262 के मतदाताओं ने पीएम आवास व पेयजल नहीं मिलने पर विरोध जताते हुए वोट नहीं दिया. इसके अलावा लिट्टीपाड़ा में धोपहाड़ी के ग्रामीणों ने भी जतायी नाराजगी, बड़ी संख्या में लोगों ने वोट नहीं डाला. रामगढ़ के साधुडीह में बूथ संख्या 127 पर भाजपा व झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई. मतदान धीमा होने के कारण जामा में बूथ संख्या 209 में लोगों का हंगामा किया.
