स्कूल में कॉलेज का गणित हल करते थे वशिष्ठ नारायण

रांची : महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. बिहार के भोजपुर जिले में दो अप्रैल 1946 को जन्मे वशिष्ठ बाबू ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा नेतरहाट आवासीय विद्यालय से प्राप्त की थी. उन्हें याद करते हुए नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र रहे प्रयाग दुबे कहते हैं […]

By Prabhat Khabar Digital Desk |
रांची : महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. बिहार के भोजपुर जिले में दो अप्रैल 1946 को जन्मे वशिष्ठ बाबू ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा नेतरहाट आवासीय विद्यालय से प्राप्त की थी.
उन्हें याद करते हुए नेतरहाट आवासीय विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र रहे प्रयाग दुबे कहते हैं कि वशिष्ठ बाबू को विद्यालय में किसी भी शिक्षक से कभी भी मिलने और प्रश्न पूछने की छूट थी. शिक्षक जब कक्षा में रहते थे तो उस समय में वे शिक्षक से सवाल पूछने आते थे.
उन्होंने बताया कि वशिष्ठ बाबू स्कूल में पढ़ने के दौरान ही स्नातक स्तर के गणित का प्रश्न हल करते थे और शिक्षकों से भी पूछते थे. स्कूल के नामांकन प्रवेश परीक्षा में भी वे टॉपर थे.
विद्यालय से स्टेट टॉपर होकर पास आउट हुए. प्रयाग, वशिष्ठ नारायण सिंह से जूनियर थे. एक बार विद्यालय के अधिकतर शिक्षक चुनाव कार्य में चले गये थे. ऐसे में विद्यालय के सीनियर विद्यार्थी क्लास लेते थे. प्रयाग कहते हैं कि उन्हें भी वशिष्ठ से पढ़ने का मौका मिला था. कुछ विद्यार्थियों को क्यूब रूट समझ में नहीं आ रहा था. सबने उन्हें समझाने के लिए कहा, तो उन्होंने अलग-अलग तरीके से क्यूब रूट के बारे में बताया.
उनके समझाने का ढंग इतना सरल था कि आज भी उन्हें तरीका याद है. उन्होंने बताया कि वशिष्ठ नारायण सिंह कभी भी परीक्षा में बीच से किसी सवाल को हल नहीं करते थे. वह एक नंबर प्रश्न से हल करते हुए अंतिम प्रश्न तक पहुंचते थे.
हमारे प्रेरणास्त्रोत रहे हैं वशिष्ठ बाबू : जेबी तुबिद
पूर्व आइएएस अधिकारी और नेतरहाट ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन से जुड़े जेबी तुबिद ने कहा कि वशिष्ठ बाबू हमारे प्रेरणास्त्रोत रहे हैं. वशिष्ठ जी नेतरहाट के बहुत ही सम्मानित पूर्ववर्ती छात्र रहे हैं.
पूरी दुनिया में उन्होंने नेतरहाट विद्यालय, झारखंड, बिहार और भारत का नाम रोशन किया है. उन्होंने लॉ अॉफ रिलेटिविटी थ्योरी को अपने शोध के माध्यम से एक अलग सिद्धांत दिया था. अमेरिका, इंगलैंड समेत पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों ने उनकी शोध को माना.हमलोग ऐसे वरिष्ठ सहयोगी के साथ जुड़ कर गौरवान्वित महसूस करते रहे हैं. हमेशा गरीबी में रहकर उन्होंने पढ़ाई की और एक समर्पित विद्यार्थी का जीवन जीया. उन्होंने यह साबित किया कि ईमानदारी, मेहनत और कर्मठता से कोई गरीब विद्यार्थी भी जीवन की ऊंचाइयों पर पहुंच सकता है. उनके निधन पर व्यक्तिगत रूप से मैं मर्माहत हूं. देश ने एक महान सपूत को खो दिया. ईश्वर उनके परिजनों को शक्ति दे.
माकपा ने श्रद्धांजलि दी
माकपा ने महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक जताते हुए श्रद्धांजलि दी. पार्टी ने जारी बयान में कहा कि एक महान शख्सियत की इस तरह मौत उनके प्रति सरकार और समाज की घोर उपेक्षा का जीता जागता उदाहरण है. माकपा सचिव मंडल सदस्य प्रकाश विप्लव ने कहा कि उनका विक्षिप्त होना भी इस पूंजीवादी व्यवस्था की मनुष्यता के प्रति निष्ठुरता का ही परिचायक है.
नोबा से जुड़े लोगों ने शोक जताया
रांची : नेतरहाट ओल्ड ब्वॉयज एसोसिएशन (नोबा) से जुड़े दुनियाभर के लोगों ने वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर शोक जताया है. साथ ही सरकार के प्रति रोष भी जताया. इसमें जापान के टोक्यो में कार्यरत विकास रंजन, पूर्व आइएएस अधिकारी नरेंद्र भगत, पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ एके चौधरी, रांची विवि के पूर्व कुलपति डॉ केके नाग, अमन कुमार, सुनील चंद्रा, गोपाल शरण, रामचंद्र चौधरी, केपी सिंह, मित्रेश्वर सहित कई पूर्ववर्ती छात्र शामिल हैं. इधर, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक संदेश प्रेषित किया है . साथ ही उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ करने का निर्देश दिया है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

👤 By Prabhat Khabar Digital Desk

Prabhat Khabar Digital Desk

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >