सुनिए झारखंड के नायकों को : साहित्य-संस्कृति के लिए झारखंड में ठिकाना नहीं, फिल्म परिषद में स्थानीय को मिले जगह

जयनंदन झारखंड बने 19 साल हो गये. इतने वर्षाें में साहित्य जगत के लिए सरकारों ने कुछ नहीं किया. कई बार अकादमी गठित करने की मांग की गयी. लेकिन आज तक इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया. झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड का भी गठन हुआ था. छत्तीसगढ़ में साहित्य को लेकर काम हो […]

जयनंदन
झारखंड बने 19 साल हो गये. इतने वर्षाें में साहित्य जगत के लिए सरकारों ने कुछ नहीं किया. कई बार अकादमी गठित करने की मांग की गयी. लेकिन आज तक इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया. झारखंड के साथ छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड का भी गठन हुआ था. छत्तीसगढ़ में साहित्य को लेकर काम हो रहा है. उत्तराखंड में भी साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया जाता है. लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हो रहा.
फिल्म परिषद जरूर बनाया गया. लेकिन उसमें ज्यादातर मुंबई के नामी कलाकारों को ही जगह मिल रही है. स्थानीय व जनजातीय कलाकारों, रंगकर्मियों को जगह कहां मिल रही है? मुंबई के कलाकार यहां आकर फिल्म बनाते हैं. उनका पेमेंट हो जाता है. सरकार में कुछ ऐसे लोग बैठे हैं. जिन्हें साहित्य की समझ नहीं है.
रंगकर्मियों के लिए बने प्रेक्षागृह : जमशेदपुर व अन्य शहरों में भी रंगकर्मियों के लिए प्रेक्षागृह बनना चाहिए. जो सस्ते अथवा टोकन राशि में आसानी से मिल सके. सिदगोड़ा में टाउन हॉल बना. लेकिन उसका रेंट ज्यादा रखा गया.
वहां ज्यादा दर्शक जुट नहीं पाते हैं. शौकिया रंगकर्मियों के लिए प्रेक्षागृह नहीं हैं. शहर में साहित्य, संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कोई तो ठिकाना होना चाहिए. प्रदेश के मंत्री, सांसद, विधायक और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को इस दिशा में सोचना चाहिए. तभी नयी पीढ़ी इससे जुड़ेगी और झारखंड में साहित्य और संस्कृति की अविरल धारा बह पायेगी.
वोट की अपील
झारखंड में 30 नवंबर से 20 दिसंबर 2019 तक अलग-अलग चरणों में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होनेवाले हैं. लोगों से अपील है कि वे अपने मतदान स्थल पर जरूर जायें अौर अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें. आपके एक-एक वोट की कीमत है. इस महापर्व में खुद शामिल हों अौर दूसरे लोगों को भी मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करें.

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