चंदन तिवारी
इस बार के चुनाव में झारखंडी कला को भी मुद्दा बनाना होगा
झारखंड की असली पहचान प्राकृतिक संसाधन, नैसर्गिक सौंदर्य, खेल और कला-संस्कृति रही है. अगर इसमें भी कला की बात करें तो यह देश के उन गिने-चुने और दुर्लभ इलाके में शामिल है, जहां कला मनोरंजन या आनंद का स्रोत है. रोजमर्रा के सामान्य जीवन का हिस्सा है.
जहां कला रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हो, वहां कला का सांस्कृतिक सरोकार न होकर, एक गहरा सामाजिक, राजनीतिक,आर्थिक सरोकार भी होना स्वाभाविक है. ऐसे में झारखंड में कला भी राजनीतिक विषय होना ही चाहिए. राजनीतिक विषय का मतलब यह भी कि यह चुनावी राजनीति में एक अहम विषय हो. अगर इसे चुनावी मुद्दे के रूप में देखें तो कला और कलाकारों का उचित सम्मान मिलना जरूरी है. यह सम्मान सिर्फ धनरूप में न होकर स्वाभिमान और आत्मसम्मान के रूप में भी हो सकता है.
इसके लिए जरूरी होगा कि कलाकारों को, कलाकार समझा जाये, न कि एक बेबस या मजबूर जरूरतमंद समुदाय. हर विधा के कलाकारों के लिए रोजगार की संभावना उसके हुनर से ही होती है, लेकिन उन्हें एक मंच देना जरूरी होता है. झारखंड में तो राग और रंग, दोनों ही दुनिया में इतनी विविधता है कि अगर उचित मंच और प्रोत्साहन मिले तो कलाकारों के लिए अलग से रोजगार के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. डोकरा आर्ट, जादूपेटिया पेंटिंग, सोहराई पेंटिंग जैसी चित्रकला यहां की पहचान है.
दूसरे राज्यों में किसी समारोह या आयोजन में स्थानीय कलाकारों से ही उनके उत्पाद खरीदने की परंपरा स्थापित हो चुकी है, वैसी ही परंपरा झारखंड में भी हो और उसके लिए एक सुव्यविस्थत तरीका हो. झारखंड में गायन और नृत्य की जो परंपरा है, उससे जुड़े कलाकारों के लिए अकादमी का निर्माण हो और उन्हें उन अकादमी के माध्यम से दुनिया भर में जाने का अवसर भी मिले सके.
वोट जरूर करें : चंदन तिवारी
इस विधान सभाचुनाव में मतदान के दिन वोट करने जरूर निकलें. यह मेरी अपील है. वोट देना आपका संवैधानिक अधिकार है. आपके हर वोट की कीमत है. एक-एक वोट ही आपको सही उम्मीदवार चुनने में मददगार साबित होगा.
