पांच साल से अंदरूनी कलह से जूझ रही भाजपा : आरपीएन

रांची : प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से 30 अक्तूबर को होनेवाली जन आक्रोश रैली की तैयारी पूरी हो चुकी है. रैली विधानसभा मैदान में दिन के 11 बजे से होगी. इसमें हिस्सा लेने को लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह मंगलवार को रांची पहुंचे. बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उन्होंने कहा कि जिस तरह सभी […]

रांची : प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से 30 अक्तूबर को होनेवाली जन आक्रोश रैली की तैयारी पूरी हो चुकी है. रैली विधानसभा मैदान में दिन के 11 बजे से होगी. इसमें हिस्सा लेने को लेकर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी आरपीएन सिंह मंगलवार को रांची पहुंचे. बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उन्होंने कहा कि जिस तरह सभी प्रमंडलों में जन आक्रोश रैली सफल हुई है, उसी तरह रांची में आयोजित दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडलीय रैली सफल होगी.

सरकार पिछले पांच वर्षों में जनता की आशाओं के अनुरूप काम नहीं कर पायी है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कैबिनेट मंत्री सरयू राय ने कहा कि अर्जुन मुंडा सर्वमान्य नेता हैं. भाजपा की आपसी लड़ाई राज्य को आईना दिखाने का काम किया है.
उन्होेंने कहा कि भाजपा के अंदर पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा अंदरूनी कलह उजागर हुई है. इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर व केशव महतो कमलेश, प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोर नाथ शाहदेव, शमशेर आलम, डॉ एम तौसीफ, ज्योति सिंह मथारू, ईश्वर आनंद ने श्री सिंह का स्वागत किया.
प्रदेश प्रवक्ता आलोक दूबे व लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कार्यक्रम स्थल का दौरा करने के बाद कहा कि जन आक्रोश रैली ऐतिहासिक होगी. इसमें लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, खूंटी, रांची के कार्यकर्ता शामिल होंगे. इन्होंने कहा कि सरकार की विफलताओं को जनता के बीच रखा जायेगा.
किसानों को पैसा दे वोट लेना चाहती है सरकार
प्रदेश कांग्रेस प्र‌वक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार किसानों की आय को लेकर उदासीन रही है. केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने को लेकर 2022 का लक्ष्य रखी है, यह संभव प्रतीत नहीं होता है, क्योंकि कृषि विकास दर जो वर्तमान में है, उसमें भी कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है.
उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण ही झारखंड के किसान आत्महत्या करने को विवश हुए. राज्य सरकार ने धान क्रय के लक्ष्य को घटा कर यह साबित कर दिया है कि किसान की समस्याओं के उचित समाधान के प्रति क्या रवैया है. सरकार सिर्फ चुनाव के वक्त किसानों के खाता में पैसा डाल कर उनसे वोट लेना चाहती है.

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