बैठक की तैयारी को लेकर दिल्ली में राज्यपाल के उपसमूह की दूसरी बैठक हुई
रांची : पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों में रहनेवाले आदिवासियों के उत्थान के लिए राष्ट्रपति सात नवंबर से तीन दिनों तक इन राज्यों के राज्यपाल के साथ बैठक करेंगे. नौ नवंबर तक चलने वाली यह बैठक अपनी 50 साल पूरी करेगी. इसे स्वर्ण जयंती बैठक भी कहा जा रहा है.
पहली बैठक 1959 में हुई थी. राष्ट्रपति के साथ होनेवाली बैठक की तैयारी के लिए शुक्रवार को पांचवीं अनुसूची राज्य के राज्यपालों के उपसमूह की बैठक नयी दिल्ली में हुई. यह दूसरी बैठक थी. इस बैठक की संयोजक झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू हैं. बैठक में छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनसुईया उईके, ओड़िशा के राज्यपाल गणेशी लाल, असम के राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी एवं मेघालय के राज्यपाल तथागत राय शामिल हुए. त्रिपुरा के राज्यपाल इस बैठक में शामिल नहीं हो सके.
बैठक में राज्यपाल के अलावा केंद्रीय मंत्री (जनजातीय मामले) अर्जुन मुंडा भी विशेष रूप से उपस्थित थे. इस बैठक में मुख्य रूप से पांचवीं अनुसूची वाले राज्य में जनजातीय समुदाय के लोगों को मिलनेवाली सुविधाएं, समस्याअों पर चर्चा की गयी. साथ ही सभी राज्यों के राज्यपाल द्वारा अब तक तैयार रिपोर्ट की समीक्षा की गयी. ताकि राष्ट्रपति के साथ होनेवाली बैठक में इसे प्रस्तुत किया जा सके.स्वर्ण जयंती बैठक होने के कारण सभी राज्यपाल को टास्क दिये गये हैं.
बैठक में आदिवासियों के हित के कई अहम फैसले लिये जाने की संभावना है. साथ ही विशेष कार्यक्रम का भी आयोजन होगा. आज की बैठक में पूर्व में दिये गये निर्देशों के अनुपालन व नयी योजना के संबंध में विचार-विमर्श किये गये. साथ ही राज्यपाल द्वारा दिये गये सुझाव को शामिल किया गया. सात नवंबर से पूर्व राज्यपाल के उपसमूह की एक अौर बैठक होने की संभावना है. ताकि रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा सके.
