रांची : प्रज्ञा केंद्रों के जरिये ई-गवर्नेंस की योजना पूरी तरह लागू नहीं हो सकी है. पहले विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी करीब डेढ़ सौ अॉनलाइन सेवाएं आम आदमी को उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया था. पर अब तक सभी प्रमाण पत्र भी इन केंद्रों के जरिये नहीं बन रहे. वहीं, गत नौ माह से जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनना भी बंद है. लेकिन सरकार इससे चिंतित नहीं है.
गौरतलब है कि रांची जिले में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना की शुरुआत 2008 में हुई थी. पर इस जिले में भी सभी सेवाएं अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं.
इसके बाद अक्तूबर-2013 में रांची के अलावा राज्य के सभी जिलों में ई-डिस्ट्रिक्ट परियोजना की शुरुआत की गयी. एक प्रज्ञा केंद्र संचालक ने कहा कि कई सेवाएं अॉनलाइन होने के बावजूद सरकारी बाबुअों से मिलना जरूरी है. जैसे तत्काल के तहत कोई प्रमाण पत्र बनाने के लिए सीअो या एसडीअो से आवेदन पर दस्तखत कराना होता है. ऐसे में तत्काल की अॉनलाइन सेवा बेमानी हो जाती है. उसी तरह विभिन्न पेंशन स्कीम (वृद्धा, विकलांगता व विधवा पेंशन) के तहत दिये गये आवेदन प्रखंड स्तर पर निरस्त कर दिये जाते हैं.
यह सब वर्ष 2011 में झारखंड इलेक्ट्रॉनिक सेवा प्रदाय अधिनियम के लागू होने तथा 2013 में इसे बाध्यकारी बनाने के बावजूद हो रहा है. इधर, आइटी विभाग कहता है कि आम नागरिकों को प्रज्ञा केंद्रों के माध्यम से बैंकिंग व अन्य ई-गवर्नेंस सेवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं. विभाग के अनुसार राज्य भर में 16 हजार प्रज्ञा केंद्र या कॉमन सर्विस सेंटर हैं. इनमें से 12500 ग्रामीण क्षेत्र में तथा 3500 शहरी क्षेत्र में हैं.
