रांची : गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखें, क्योंकि उत्पाद की गुणवत्ता ही एक कंपनी को मजबूत बनाती है. एचइसी ने हमेशा इसका ध्यान रखा है, जिससे इसकी अच्छी छवि बनी हुई है.
साथ ही इसे बड़े-बड़े काम मिल रहे हैं. यह बातें एचइसी के सीएमडी एमके सक्सेना ने कही़ वे शुक्रवार को क्यूसीआइ और पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित छठी क्षेत्रीय क्वालिटी कॉनक्लेव (आरक्यूसी) में बोल रहे थे. कॉन्क्लेव का विषय ‘गुणवत्ता संस्कृति का निर्माण और निरंतरता’ था. श्री सक्सेना ने कहा कि सरकार ने एचइसी के काम की गुणवत्ता को देखते हुए कई प्रोजेक्ट में काम करने का मौका दिया है. चंद्रयान-2 की सफलता में एचइसी का भी योगदान है. यूआइडीएआइ के एडीजी देव शंकर ने कहा कि गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए नयी तकनीकों का इस्तेमाल करें.
क्वालिटी कल्चर का समावेश संगठन में होना चाहिए : पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के निदेशक डॉ जतींद्र सिंह ने कहा कि क्वालिटी कल्चर का समावेश पूरे संगठन में होने चाहिए. पीएचडी चेंबर, झारखंड के विशाल चौधरी ने भी अपने विचार रखे. तकनीकी सत्र में सेल की इडी कामाक्षी रमन, अमेठी विवि के वीसी प्रो (डॉ) रमन कुमार झा, मेकॉन के डीजीएम (एचआरडी) संदीप सिन्हा, पीवीयूएन लिमिटेड के एजीएम राजेश शर्मा सहित अन्य ने विचार रखे.
रांची़ : वेतन पुनरीक्षण पर केंद्र ने नहीं लगायी रोक
रांची़ : केंद्र सरकार की गाइड लाइन के अनुसर, एचइसी के अधिकारियों का वेतन पुनरीक्षण नहीं हो सकता है. यह तभी हो सकता है, जब कंपनी लगातार तीन वर्षों से मुनाफा कमा रही हो. पर, इस गाइड लाइन के तहत एचइसी के कामगार नहीं आते हैं. इसमें शर्त है कि मजदूरों के वेतन पुनरीक्षण से बढ़ने वाला खर्च कंपनी को वहन करना होगा.
इसके लिए सरकार कंपनी को कोई आर्थिक मदद नहीं देगी. मालूम हो कि 27 अगस्त को क्षेत्रीय श्रमायुक्त डीके सिंह की अध्यक्षता में त्रिपक्षीय बैठक हुई थी. बैठक में केंद्र सरकार के सर्कुलर पर चर्चा हुई थी. इसमें स्पष्ट हुआ कि इस सर्कुलर के तहत कामगार नहीं आते हैं. इसके बाद प्रबंधन ने भी श्रमायुक्त के समक्ष स्वीकार किया कि कामगारों का वेतन पुनरीक्षण हो सकता है, लेकिन कंपनी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है.
इसलिए वेतन पुनरीक्षण से आनेवाले आर्थिक भार को कंपनी पूरा नहीं कर सकती है. वहीं मंच के नेताओं का कहना है कि यदि हड़ताल का नोटिस नहीं दिया जाता, तो यह स्पष्ट नहीं होता कि कामगारों के वेतन पुनरीक्षण पर रोक नहीं है. पूर्व में प्रबंधन का कहना था कि बिना केंद्र की अनुमति के वेतन पुनरीक्षण नहीं हो सकता है.
यह बात मान्यता प्राप्त यूनियन भी कह रही थी, लेकिन सर्कुलर पढ़ने के बाद श्रमायुक्त ने स्पष्ट कर दिया कि कामगारों के वेतन पुनरीक्षण के लिए यह सर्कुलर नहीं है. सिर्फ अधिकारियों के लिए है. मालूम हो कि वर्ष 1992, वर्ष 1997 व वर्ष 2007 के वेतन पुनरीक्षण के समय भी कंपनी की आर्थिक स्थिति वर्तमान से काफी खराब थी, लेकिन प्रबंधन को वेतन पुनरीक्षण करना पड़ा था.
