रांची :राज्य भर में टीबी व कुष्ठ रोगियों की पहचान के लिए एक से 14 जुलाई तक अभियान चलाया गया. यह अभियान वैसे नये रोगियों की पहचान के लिए था, जो इलाजरत नहीं हैं. अभियान की समाप्ति के बाद 29 जुलाई तक सभी संदेहास्पद रोगियों की स्क्रीनिंग कर वास्तविक संख्या घोषित होनी थी.
पर यह काम अनुबंध कर्मियों की हड़ताल के कारण नहीं हो सका है. सोमवार को स्वास्थ्य सचिव के कक्ष में इस संबंध में हुई बैठक में चिकित्सा पदाधिकारियों ने बताया कि टीबी व कुष्ठ रोगियों से संबंधित फाइनल रिपोर्ट नहीं मिल सकी है. एक अधिकारी ने बताया कि अभी इसमें वक्त लगेगा. इससे पहले 11 जुलाई तक राज्य भर में कुष्ठ के 12,467 तथा टीबी के 21,868 संदेहास्पद रोगी चिह्नित हुए थे़ इनमें से टीबी के 628 वास्तविक मरीजों की पहचान कर ली गयी थी.
टीबी की जानकारी देना जरूरी : टीबी अधिसूचित बीमारी है. झारखंड में इसे नौ मई 2018 को अधिसूचित किया गया था. रोगी के घरवालों को इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य है. ऐसा नहीं करने पर छह माह तक कारावास या जुर्माना या दोनों तथा अधिकतम दो वर्ष या जुर्माना या दोनों (आइपीसी-270) हो सकता है.
