रांची : गंभीर अपराध के मामले में राज्य की महिला या युवती को अब केस दर्ज कराने के लिए थाना क्षेत्र की बाध्यता नहीं होगी. अर्थात गंभीर अपराध होने पर महिला या युवती घटनास्थल से नजदीक जो भी थाना होगा, वहां जीरो एफआइआर दर्ज करा सकती है.
जीरो एफआइआर दर्ज करने के बाद संबंधित थाना की पुलिस मामले को घटना स्थल क्षेत्र की पुलिस को केस के अनुसंधान और मामले में आगे की कार्रवाई के लिए एफआइआर भेज देगी. जीरो एफआइआर दर्ज करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर सीआइडी मुख्यालय ने राज्य के सभी जिलों के एसपी को निर्देश जारी किया है.
सुरक्षा की दृष्टि से दिया गया निर्देश : गृह मंत्रालय ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि वे अफसरों को केस दर्ज करने के लिए जागरूक करने की दिशा में रिफ्रेशर कोर्स का भी आयोजन करे. महिला और युवती के खिलाफ गंभीर अपराध के मामले में छेड़खानी और इससे संबंधित अन्य घटनाएं जो आइपीसी की विभिन्न धाराओं में दर्ज होते हैं, के अलावा मानव तस्करी, रेप और सामूहिक दुष्कर्म सहित अन्य घटनाअों को रखा गया है. केस दर्ज करने का यह नया प्रावधान महिलाओं की सुरक्षा और मामले में तत्काल कार्रवाई करने के दृष्टिकोण से किया गया है.
पुलिस क्यों दर्ज नहीं करती है जीरो एफआइआर : उल्लेखनीय है कि देश में जीरो एफआइआर करने का प्रावधान पहले से है. लेकिन थाना क्षेत्र की सीमा के विवाद के कारण पुलिस जीरो एफआइआर दर्ज नहीं करती है. कुछ वर्ष पूर्व खेलगांव में एक महिला खिलाड़ी के साथ छेड़खानी की घटना हुई थी. चूंकि वह महाराष्ट्र की रहनेवाली थी और किसी कारणवश स्थानीय थाना में केस दर्ज नहीं करा सकी थी इसलिए महाराष्ट्र पहुंचने के बाद वहां के थाने में जीरो एफआइआर दर्ज कराया था.
बाद में केस का अनुसंधान कर मामले में कार्रवाई के लिए महाराष्ट्र पुलिस ने केस रांची जिला पुलिस के पास भेज दिया था. जिसके बाद मामले में खेलगांव थाना में केस दर्ज किया गया था. वहीं ,15 जुलाई को सिद्धो- कान्हू पार्क के समीप पास भी एक युवती से मारपीट और छेड़खानी की घटना हुई थी. उस वक्त वह घटनास्थल के समीप स्थित गोंदा थाना पहुंची. लेकिन घटनास्थल लालपुर थाना क्षेत्र में होने की वजह से पुलिस ने केस दर्ज कराने के लिए युवती को लालपुर थाना भेज दिया. जिसके बाद युवती की शिकायत पर लालपुर थाना में केस दर्ज हुआ.
