उजाड़ हो चुके एनएच-33 के किनारे हो पौधरोपण

रांची : खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर उजाड़ व सूना हो चुके एनएच-33 के किनारे पौधरोपण कराने की सलाह दी है. श्री राय ने लिखा है कि आपको स्मरण होगा कि रांची से बहरागोड़ा वाया जमशेदपुर के बीच एनएच-33 के दोनों किनारों पर पहले वृक्षों की सघन कतार […]

रांची : खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर उजाड़ व सूना हो चुके एनएच-33 के किनारे पौधरोपण कराने की सलाह दी है. श्री राय ने लिखा है कि आपको स्मरण होगा कि रांची से बहरागोड़ा वाया जमशेदपुर के बीच एनएच-33 के दोनों किनारों पर पहले वृक्षों की सघन कतार हुआ करती थी. सड़क को चौड़ा करने के लिए इन्हें काट दिया गया. रांची से जमशेदपुर आने-जाने वालों के लिये वृक्ष विहीन एनएच-33 सूना लगता है.

वन एवं पर्यावरण विभाग को सौंपा जाये दायित्व: श्री राय ने लिखा है कि पथ चौड़ीकरण का सीमांकन हो जाने के बाद सड़क किनारे के वृक्षों की कटाई जिस समय शुरू हुई थी, उसी वक्त मैंने सुझाव दिया था कि निर्माणाधीन फोरलेन सड़क के किनारे वृक्षों की सघन कतार लगाने का काम तुरंत शुरू हो. यह दायित्व वन एवं पर्यावरण विभाग को सौंपा जाये. विडंबना है कि मेरे सुझाव पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.
उस समय यदि एनएच-33 के किनारे पौधरोपण शुरू हो गया होता, तो ये पौधे अब तक काफी बड़े हो गये होते. वन महोत्सव के अवसर पर मैं पुनः यह सुझाव दोहराना चाहता हूं.
इस वर्ष आयोजित हो रहे वन महोत्सव कार्यक्रमों के दौरान एनएच-33 के दोनों किनारों पर पौधरोपण शुरू कर दिया जाये. इसमें रांची से बहरागोड़ा के बीच स्थित सभी वन प्रमंडलों को उनके सीमा क्षेत्र में सघन पौधारोपण अभियान चलाने और रोपे गये पौधों को बचाने का दायित्व सौंपा जाये.
जिन प्रजातियों के वृक्षों की कटाई एनएच-33 चौड़ीकरण के दौरान जिन स्थलों पर हुई है, वहां पर उनका रोपण किया जाना श्रेयस्कर होगा. इसके अतिरिक्त विविध रंगों वाले पुष्प वृक्षों का रोपण भी स्थान-स्थान पर हो, तो इनके बड़े व पुष्पित होने पर कालांतर में यात्रियों एवं स्थानीय लोगों के लिये नयनाभिराम नजारा दिखेगा.
ऐसा हुआ तो एनएच-33 का सूनापन दूर हो जायेगा तथा कुछ वर्षों में सड़क के दोनों किनारे, वृक्षों की हरियाली से परिपूर्ण हो जायेंगे. इससे इस सड़क के किनारे के वृक्षों की कटाई से हुए नुकसान की भरपाई भी काफी हद तक हो जायेगी. इस बारे में आवश्यक निर्देश वन एवं पर्यावरण विभाग को देंगे.

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