झारखंड कंबाइंड की गलती से कई छात्रों का लटका एडमिशन

कॉलेज व कार्यालय का लगा रहे चक्कर, नहीं हो रही सुनवाई साइट पर दिये गये फोन नंबर पर नहीं हो पाता है संपर्क जमशेदपुर से आया छात्र पिता के साथ भटकता रहा रांची : झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (झारखंड कंबाइंड) की गलती से कई विद्यार्थियों का नामांकन उन्हें आवंटित कॉलेज में नहीं हो […]

कॉलेज व कार्यालय का लगा रहे चक्कर, नहीं हो रही सुनवाई
साइट पर दिये गये फोन नंबर पर नहीं हो पाता है संपर्क
जमशेदपुर से आया छात्र पिता के साथ भटकता रहा
रांची : झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (झारखंड कंबाइंड) की गलती से कई विद्यार्थियों का नामांकन उन्हें आवंटित कॉलेज में नहीं हो रहा है.
ऐसा विद्यार्थियों से संबंधित श्रेणी बदल जाने से हो रहा है. इससे परेशान विद्यार्थी व उनके अभिभावक आवंटित कॉलेज और नामकुम स्थित झारखंड कंबाइंड कार्यालय के बीच चक्कर लगा रहे हैं. हालत यह है कि कंबाइंड के कार्यालय में न कोई उनकी बात सुनने वाला है और न ही सुझाव देना वाला. उनका आवेदन भी स्वीकार नहीं किया जा रहा है. इससे काफी असमंजस की स्थिति बन गयी है.
जेनरल कैटेगरीवाले को इडब्ल्यूएस श्रेणी में डाला, फंसा एडमिशन
बागबेड़ा, जमशेदपुर के रहनेवाले सिद्धनाथ पांडेय के साथ भी यही हुआ है. सिद्धनाथ (रोल नं-1941100250), पिता मनोज कुमार पांडेय की पारिवारिक आय 8.5 लाख रुपये सालाना है.
जेनरल कैटेगरी के इस छात्र को झारखंड कंबाइंड ने आर्थिक रूप से कमजोर (इडब्ल्यूएस) श्रेणी में डाल दिया. जब पीसीबी ग्रुप के जेनरल कैटेगरी का कैंडीडेट सिद्धनाथ आवंटित वेटनरी कॉलेज, कांके पहुंचा, तो वहां उसका नामांकन यह कहकर लेने से इनकार कर दिया गया कि वह आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में नहीं आते हैं.
इसके बाद जब वह अपने पिता के साथ नामकुम पहुंचा, तो वहां कोई सुननेवाला नहीं था. जमशेदपुर से आये उसके पिता यहां-वहां भटक रहे हैं. वहां कई विद्यार्थियों ने शिकायत की कि किसी सहायता के लिए झारखंड कंबाइंड की साइट पर दिये गये मोबाइल नंबर (9264473893, 9264473891) पर संपर्क करने पर या तो वह स्विच ऑफ मिलता है या फिर व्यस्त. विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को समझ नहीं आ रहा कि वह क्या करें.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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