रांची : डालीकतारी पहनई जमीन को बचाने की गुहार लगायी

रांची : पुरानी रांची के आदिवासियों ने अपनी 2़ 89 एकड़ धार्मिक-सामाजिक भुइंहरी पहनई (डालीकतारी) जमीन बचाने के लिए आदिवासी कल्याण समिति ग्राम सभा के बैनर तले सरना स्थल में विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस-प्रशासन ने उन्हें हरमू बाइपास रोड पर मानव शृंखला बनाने से रोक दिया, जिसके बाद ग्रामीण सरना स्थल पर जुटे. ग्राम सभा […]

रांची : पुरानी रांची के आदिवासियों ने अपनी 2़ 89 एकड़ धार्मिक-सामाजिक भुइंहरी पहनई (डालीकतारी) जमीन बचाने के लिए आदिवासी कल्याण समिति ग्राम सभा के बैनर तले सरना स्थल में विरोध प्रदर्शन किया. पुलिस-प्रशासन ने उन्हें हरमू बाइपास रोड पर मानव शृंखला बनाने से रोक दिया, जिसके बाद ग्रामीण सरना स्थल पर जुटे.

ग्राम सभा के अध्यक्ष दिगंबर टोप्पो ने बताया कि इस जमीन को मो जमाल ने 1937 के फर्जी सादा हुकुमनामा के आधार पर प्रशासनिक पदाधिकारियों से मिल कर इसकी अवैध जमाबंदी खोल दी है. अपर समाहर्ता ने भी आदिवासियों की सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था की जमीन की जानकारी नहीं होने के कारण भूमाफियाओं के पक्ष में आदेश जारी कर दिया. इससे रांची मौजा की सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था खतरे हमें है और इस आदेश से लगभग 1200 परिवार प्रभावित होंगे.

उन्होंने कहा कि हमें केस मुकदमों में उलझा कर एक आदिवासी भुइंहरी पहनई जमीन को गैर आदिवासी जमीन बना कर हड़पने का षड्यंत्र किया जा रहा है. सरकार उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में हुई आदिवासियों की निर्मम हत्या की पुनरावृत्ति देखना चाहती है. विरोध प्रदर्शन में अतुल केरकेट्टा, सुनीता लकड़ा, मुन्नी कच्छप, सलगी कच्छप, नीलू केरकेट्टा, जतरू गाड़ी, विश्वास उरांव, लक्ष्मी आिद मौजूद थे.

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