कार्यकाल में शिक्षकों को नहीं मिली प्रोन्नति, अिधकारी कर रहे अनदेखी
25 वर्षों से शिक्षकों को हो रहा है आर्थिक नुकसान
रांची : राज्य के हाइस्कूलों में कार्यरत शिक्षकों में से लगभग 10,000 से अधिक वरीय शिक्षक वर्ष 1996 (25 वर्षों से) प्रवरण वेतनमान से वंचित हैं.
एकीकृत बिहार के समय लागू सेवा शर्त नियमावली में प्रवरण वेतनमान देने का प्रावधान है. उन्हें प्रति माह आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन इसकी चिंता जिलों में पदस्थापित होनेवाले शिक्षा अधिकारियों को नहीं है. अधिकांश जिले सिर्फ खानापूर्ति में लगे हुए हैं.
यह स्थिति तब है, जब राज्य सरकार द्वारा शिक्षकों को प्रवरण वेतनमान देने का आदेश दिया जा चुका है. सरकार के स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक से लेकर क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशकों के निर्देश की भी परवाह विभाग के कनीय अधिकारी नहीं कर रहे हैं. सरकार का आदेश मिलने के बावजूद प्रोन्नति नहीं मिलने से शिक्षक क्षुब्ध हैं.
तीन जिलों ने दी है प्रोन्नति, 21 जिले के शिक्षक हैं वंचित : देवघर, पाकुड़ व गढ़वा के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीइअो) ने हाइस्कूलों के वरीय शिक्षकों को प्रवरण वेतनमान का लाभ दे दिया है. झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ का कहना है कि रांची सहित राज्य के 21 जिलों के शिक्षकों को उक्त प्रोन्नति नहीं दी गयी है. रांची में पिछले तीन वर्षों से प्रोन्नति देने की अब तक रणनीति भी तय नहीं हो पायी है.
सूची बनती है. फिर संशोधन के नाम पर दोबारा सूची बनायी जाती है. वह सूची पिछले तीन वर्षों में फाइनल नहीं हो पायी है, जबकि इस अवधि में कई डीइअो का स्थानांतरण-पदस्थापन हो चुका है.
प्रवरण वेतनमान हाइस्कूल के शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग है. नियमावली के अनुसार वेतनमान देना है. पहले सरकार देना नहीं चाहती थी आैर जब सरकार लगभग तीन वर्ष पहले आदेश निर्गत कर चुकी है, तो शिक्षा अधिकारी टाल-मटोल कर रहे हैं. प्रवरण वेतनमान शिक्षकों को शीघ्र दिया जाना चाहिए.
