पदभार संभालने के बाद बीआइटी मेसरा के नये कुलपति डॉ एस कोनार ने कहा
देश-विदेश में मौजूद संस्थान के विद्यार्थियों से सहयोग मांगा जायेगा
आधारभूत संरचनाओं को सुधारने पर भी लगातार दिया जायेगा जोर
रांची : किसी भी संस्थान की पहचान उसके टीचिंग स्टैंडर्ड और शोध कार्यों से होती है. पूरे इस्टर्न इंडिया में बीआइटी मेसरा की अलग पहचान है और इसी कारण यह आइआइटी का दर्जा प्राप्त संस्थानों को 30 सालों से टक्कर दे रहा है.
इस पहचान को बरकरार रखने तथा टीचिंग स्टैंडर्ड को और अपग्रेड करने में सबका सहयोग जरूरी है. पूरे देश में 3800 से अधिक इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट्स हैं. इनमें एकेडमिक और रिसर्च वर्क आज भी बेहतर हैं.
यह बात बीआइटी मेसरा के नये प्रभारी कुलपति डॉ एस कोनार ने कही. वह प्रभात खबर से विशेष बातचीत कर रहे थे. डॉ कोनार ने कहा कि वर्तमान में बीआइटी मेसरा में कई नये कोर्स शुरू हो चुके हैं. ये सारे ब्रांच किसी न किसी रूप में संस्थान को बेहतर करने में सहयोग कर रहे हैं. इन सारे कोर्सेज को और बेहतर करने की आवश्यकता है. इसके लिए सबका सहयोग चाहिए. बीआइटी मेसरा की स्थापना 1955 में हुई. यह संस्थान पूरे इस्टर्न इंडिया के लीडिंग इंस्टीट्यूट ग्रुप में है. यह आइआइटी के बराबर मापदंड रखनेवाला संस्थान है.
इसे और कैसे बेहतर किया जा सकता है, इस पर विचार किया जायेगा. आधारभूत संरचनाओं को और कैसे सुधारा जाये, इस पर भी बात होगी. जिससे संस्थान शोध-अनुसंधान के क्षेत्र में नया आयाम स्थापित कर सके. एक सवाल के जवाब में डॉ कोनार ने बताया कि समय-समय पर चेयरमैन का भी सुझाव मिलता रहता है और उन पर गंभीरता से विचार कर अमल करने की कोशिश होगी.
एल्यूमनी एसोसिएशन से भी मांगा जायेगा सहयोग
डॉ कोनार ने कहा कि बीआइटी मेसरा से कई ऐसे विद्यार्थी निकले हैं, जो देश-विदेश में उच्च पदों पर काबिज हैं. वैसे विद्यार्थियों से भी संस्थान को अपग्रेड करने की दिशा में सहयोग मांगा जायेगा, ताकि संस्थान को नयी दिशा मिल सके. उन्होंने बताया कि एल्यूमनी एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक बुलाकर इस पर बात होगी. विदेशों के इंस्टीट्यूट्स में क्या विशेष हो रहा हैं, प्लेसमेंट की क्या स्थिति है? इन सारे बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा होगी.
